इस समय भारत और चीन के बीच लद्दाख में गतिरोध जारी है जिसके हल करने के लिए भारत के साथ डिप्लोमेटिक और सैन्य स्तर पर बातचीत कर रहा है। लेकिन इसी दौरान चीन अपनी नापाक चाल से बाज नहीं आ रहा है। ड्रैगन ने भारत से लगी सीमा के नजदीक कम से कम 8 एयरबेस या हेलीपैड को एक्टिवेट किया है जहां से वह अपनी युद्धक गतिविधियों को जारी रख सकता है। हाल में ही शिनजियांग प्रांत में स्थित होटान एयरबेस पर तैनात चीनी फाइटर जेट और अवाक्स प्लेन की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं थीं।
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट Detresfa ने एक तस्वीर जारी कर एलएसी के नजदीक चीनी एयरबेस की डिटेल्स शेयर की है। इसमें संबंधित एयरबेस पर तैनात एयरक्राफ्ट के बारे में भी जानकारी दी गई है। बता दें कि अत्याधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण चीन इस इलाके में हवाई शक्ति के मामले में भारत से कमजोर है। जबकि भारतीय एयरबेस निचले क्षेत्र में हैं जहां से वे अपनी पूरी क्षमता के साथ चीन के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
चीन के पास शेनयांग जे 11 फाइटर प्लेन है जिसकी रेंज 3530 किलोमीटर है। जो 2500 किमी प्रतिं घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकता है। वर्तमान समय में चीन के पास इस प्लेन के 250 से ज्यादा यूनिट मौजूद हैं। यह प्लेन रूस की एसयू 27 एसके का लाइसेंस वर्जन है। यह प्लेन हवाई क्षेत्र की रक्षा और जमीन पर हमला करने के मामले में सक्षम है। इस प्लेन में 30 मिलीमीटर की एक कैनन भी लगी हुई है। जबकि इसके 10 हार्ड प्वॉइंट पर कई तरह की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं।
इसके अलावा चीन के पास शेनयांग जे-8 इंटरसेप्टर है जो मूल रूप से रूस से चुराई गई डिजाइन पर आधारित है। सिंगल सीटर यह प्लेन तेजगति से अत्याधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है। हालांकि, इस विमान की ताकत को लेकर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। अधिक ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह प्लेन आधे फ्यूल और आधे हथियार से ही हमला कर सकता है।
भारत के पास लगभग 270 लड़ाकू विमान और 68 ग्राउंड अटैक फाइटर जेट हैं। वहीं, भारत ने पिछले कुछ दशकों में चीन से लगी सीमा पर कई हवाई पट्टियों का निर्माण किया है जहां से ये फाइटर जेट आसानी से उड़ान भर सकते हैं। वहीं, इस स्टडी के अनुसार, चीन के पास 157 फाइटर जेट्स और एक छोटा ड्रोन का बेड़ा भी है। इस स्टडी में बताया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स भारत से लगी सीमा क्षेत्र में आठ ठिकानों का उपयोग करती है, लेकिन इनमें से अधिकांश नागरिक हवाई क्षेत्र हैं।
यह बात सही है कि भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 और सुखोई एसयू 30 लड़ाकू विमान को चीन के जे-10, जे-11 और एसयू-27 लड़ाकू विमानों पर बढ़त हासिल है। चीन ने भारत से लगी सीमा पर इन्हीं विमानों को तैनात किया है। भारतीय मिराज 2000 और एसयू -30 जेट्स ऑल-वेदर, मल्टी-रोल विमान हैं जबकि चीन का जे-10 ही ऐसी योग्यता रखता है। बेलफर की स्टडी बताती है कि चीन ने अपने पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों को अमेरिका के कथित खतरे से बचाने के लिए मजबूत किया है। इस कारण पश्चिमी क्षेत्र में उसके चार एयरफील्ड कमजोर हुए हैं।