पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव खत्‍म करने को लेकर राजी हुए चीन ने शर्त रखी है। शर्त यह है कि भारतीय सेना पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर ऐडवांस्‍ड पोजिशंस से वापस जाए। भारत ने चीन से साफ कह दिया है कि अगर सेनाएं हटेंगी तो दोनों तरफ से हटेंगी। एकतरफा ऐक्‍शन नहीं होगा।

अगस्‍त के आखिर में भारतीय सैनिकों ने चुशूल सब-सेक्‍टर में अपने पैट्रोलिंग पॉइंट्स से आगे जाकर ऐडवांस्‍ड पोजिशंस पर पैठ बना ली थी। अब इस इलाके में भारत का दबदबा है क्‍योंकि न सिर्फ उसकी नजर स्‍पांगुर गैप पर है, बल्कि मोल्‍दो में चीनी टुकड़ी भी उसकी निगाह में है। इसी घटनाक्रम के बाद चीन के तेवर बदले हुए हैं। ताजा बातचीत में चीनी चाहते थे कि भारत पहले दक्षिणी तट की पोजिशंस खाली कर दे। भारत ने मांग की कि एक साथ दोनों पक्ष झील के दोनों किनारों से पीछे हटें।
भारत और चीन के पास कोर कमांडर स्‍तर पर सात राउंड बातचीत हो चुकी है। राजनीतिक स्‍तर पर भी चीन के रुख को लेकर भारत सतर्क है। मॉस्‍को में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों की बातचीत के बावजूद जमीन पर चीन के तेवर नहीं बदले हैं। एक सूत्र ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा, "बीजिंग कहता है कि वह दोनों देशों की सीमा पर शांति और खुशहाली चाहता है। लेकिन भारत भी तो यही चाहता है। वे यह नहीं बताते कि उन्‍होंने इतनी संख्‍या में सैनिक वहां जमा क्‍यों किए।" उन्‍होंने कहा, "कुछ भी हो सकता है। विश्‍वास नहीं होता चीन पर। हम किसी भी तरह की चुनौती के लिए तैयार हैं।"
भारतीय सेना के मुताबिक अभी एलएसी पर हालात वैसे ही बने हुए हैं। लेकिन अब धीरे धीरे ठंड बढ़ रही है। कई जगह पर तापमान माइनस 10 तक पहुंच गया है और नवंबर-दिसंबर में यह माइनस 30 से माइनस 40 तक हो जाएगा। मुमकिन है कि उस वक्त चीन अपने सैनिकों की संख्या कुछ कम करे। ईस्टर्न लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे यानी फिंगर एरिया में फिंगर-4 के पास, पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे रिजांग ला, रिचिंग ला के पास भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। इसके अलावा पीपी-17 और डेपसांग एरिया में भी दोनों देशों के सैनिक आमने सामने हैं। डेपसांग में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों की पट्रोलिंग रोकी हुई है।