चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बना ली है जिसके बाद अब वो अफ्रीका के अटलांटिक तट पर अपना सैन्य अड्डा बना जा रहा है। चीन का अफ्रीका के जिबूती में पहले से ही एक सैन्य अड्डा है जहां से वो अदन की खाड़ी और अरब सागर की चौकसी करता है। अब अमेरिकी क्लासिफाइड खुफिया रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन मध्य अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी में अटलांटिक महासागर के तट पर अपना पहला स्थायी सैन्य अड्डा बना रहा है।

खबर है कि चीन ने इक्वेटोरियल गिनी के तटीय शहर बाटा में अपना सैन्य अड्डा स्थापित करने जा रहा है। चीन इस बेस के जरिए अमेरिका के पश्चिमी तट के नजदीक अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों को तैनात करने और उनकी मरम्मत करने में सक्षम होगा। इसे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन और वाइट हाउस के लिए खतरे की घंटी बताया जा रहा है।

चीन की इस चाल को नाकाम करने के लिए अमेरिका के प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फिनर ने अक्टूबर में इक्वेटोरियल गिनी का दौरा किया था। उन्होंने इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति तेओदोरो ओबियांग न्गुएमा माबासोगो और उनके बेटे उपराष्ट्रपति तेओदोरो "टेओडोरिन" न्गुमा ओबियांग मंगू को चीन के प्रस्तावों को अस्वीकार करने के लिए मनाने की कोशिश की थी।

बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समुद्री-सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए हमारी कूटनीति के हिस्से के रूप में हमने इक्वेटोरियल गिनी को स्पष्ट कर दिया है कि चीनी गतिविधि से जुड़े कुछ संभावित कदम राष्ट्रीय-सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाएंगे। चीन और अमेरिका के बीच रस्साकस्सी एक ऐसे देश में चरम पर जा रही है, जिसका नाम आजतक अधिकतर लोगों ने नहीं सुना होगा।

अमेरिका के सैन्य अड्डे पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। हाल में चीन और अमेरिका ताइवान, हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट और कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर आमने सामने हैं। अमेरिका जानता है कि अगर चीन ने अटलांटिक महासागर में सैन्य अड्डा बना लिया तो इससे बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। चीनी पनडुब्बियां अमेरिका के पश्चिमी तट के आसपास तक पहुंच सकती हैं।