अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉन्गकॉन्ग को आर्थिक मामलों में प्राथमिकता देने को ख़त्म करने का आदेश जारी किया है। ट्रंप का ये फ़ैसला हॉन्गकॉन्ग में नए सुरक्षा क़ानून के लागू होने के बाद आया है। ट्रंप ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अब हॉन्गकॉन्ग का दर्जा भी मेनलैंड चायना की तरह ही होगा। हॉन्गकॉन्ग में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर पाबंदी लगाने के क़ानून को भी ट्रंप की हरी झंडी मिल गई है।

चीन ने अमरीका के इस क़दम की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि वो जवाबी कार्रवाई करेगा। अमरीका का कहना है कि नए सुरक्षा क़ानून से हॉन्गकॉन्ग के लोगों की आज़ादी पर ख़तरा पैदा हो गया है। एक पत्रकार के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, "हम कोरोना वायरस की जानकारी छिपाने और पूरी दुनिया में फैलाने के लिए चीन को पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराते हैं।" हालाँकि, अमरीका में कोरोना वायरस के मामलों को लेकर ट्रंप सरकार पर भी सवाल उठे हैं। अमरीका में सबसे ज़्यादा 34 लाख मामले दर्ज हुए हैं, जबकि 1,36,000 लोग मारे गए हैं।

ट्रंप ने क्या कहा है

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके कार्यकारी आदेश से हॉन्गकॉन्ग को मिलने वाली विशेष सुविधा ख़त्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, "कोई विशेष सुविधा नहीं, कोई विशेष आर्थिक सुविधा नहीं और संवेदनशील तकनीक का निर्यात नहीं।" ट्रंप ने मई में ही इसकी घोषणा की थी कि हॉन्गकॉन्ग का विशेष दर्जा ख़त्म करने की शुरुआत होगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों को ये भी जानकारी दी कि उन्होंने हॉन्गकॉन्ग स्वायत्ता विधेयक को मंज़ूरी दे दी है। इस महीने के शुरू में अमरीकी संसद ने इसे पास किया था। उन्होंने कहा, "ये क़ानून मेरे प्रशासन को नए शक्तिशाली अधिकार देता है, जिससे हॉन्गकॉन्ग की आज़ादी को कम करने वाले लोगों और संस्थाओं को ज़िम्मेदार ठहराया जा सके।"

1997 में हॉन्गकॉन्ग को चीन को सौंप दिया गया था। हॉन्गकॉन्ग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था। 1984 में हॉन्गकॉन्ग को लेकर ब्रिटेन और चीन के बीच समझौता हुआ था। समझौते में हॉन्गकॉन्ग को विशेष दर्जा देने पर दोनों देशों के बीच सहमति हुई थी। माना जा रहा है कि हॉन्गकॉन्ग में लागू किए गए सुरक्षा क़ानून से इसका उल्लंघन होता है। इस क़ानून के तहत चीन की सरकार की आलोचना पर भी रोक है।

चीन ने क्या कहा है

चीन का कहना है कि ये उसके आंतरिक मामलों में दख़लंदाज़ी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने अमरीका के इस क़दम की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चीन भी अपने हितों की रक्षा के लिए अमरीकी लोगों और संस्थाओं पर पाबंदी लगाएगा। बयान में कहा गया है- हॉन्गकॉन्ग में नए सुरक्षा क़ानून को लागू करने से रोकने की अमरीका की कोशिश कभी सफल नहीं होगी। हम अमरीका से अपील करते हैं कि वो अपनी ग़लती सुधारे। इस क़ानून को लागू न करे और चीन के आंतरिक मामलों में दख़ल देना बंद करे। अगर अमरीका ने ऐसा करना जारी रखा, तो चीन भी इसका कड़ाई से जवाब देगा।

हॉन्गकॉन्ग का विशेष दर्जा समाप्त करने का मतलब ये है कि अब वहाँ काम कर रही कंपनियाँ ये पता करेंगी कि उन पर इसका क्या और कैसे असर होगा। हॉन्गकॉन्ग कई देशों के निर्यात का केंद्र है। यानी जो सामान हॉन्गकॉन्ग से अमरीका आते हैं, दरअसल वे कहीं और से हॉन्गकॉन्ग में आते हैं। उदाहरण के लिए चीन हॉन्गकॉन्ग के माध्यम से सामानों का निर्यात करके उन व्यापार शुल्कों से बच जाता है, जो अमरीका ने चीन पर लगाए हैं। अब हॉन्गकॉन्ग का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद मेनलैंड चायना की कंपनियों को किसी अन्य जगह की तलाश करनी होगी। और इस कारण हॉन्गकॉन्ग के पोर्ट और अन्य सहायता देने वाले व्यवसाय पर इसका असर पड़ेगा।

लेकिन क्या इससे अमरीकी और अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी असर पड़ेगा, जो हॉन्गकॉन्ग का इस्तेमाल कर रही थीं। जानकारों की मानें तो हॉन्गकॉन्ग से काम करने की कई वजहें हैं, जो अब भी बनी हुई हैं। जैसे वहाँ का कम टैक्स रेट, अच्छी भौगोलिक स्थिति और मुद्रा की परिवर्तनीयता।