चीन का सैन्य उपकरणों पर खर्च भारत की तुलना में 4 गुना अधिक है। हालांकि भारत की सेना पर भी पेंशन बिल और दूसरे बड़े खर्चे किए जा रहे हैं। अमरीका डिफेंस पर खर्च करने वाला सबसे बड़ा देश है। डिफेंस पर अमरीका का खर्च उसके बाद खर्च करने वाले आठ देशों के कुल खर्चे से भी अधिक है।


नए डेटा ग्लोबल थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट(सिपरी) की ओर से जारी किए गए हैं। चीन ने लगातार 24 वें साल अपने डिफेंस बजट में खासी बढ़ोतरी की है। चीन का फोकस स्पष्ट है कि अपने मुख्य प्रतिद्वंदी अमरीका की तुलना में सैन्य क्षमता के आधार पर भी अधिक से अधिक ताकतवर बन सके। साथ ही चीन की कोशिश ताइवान और साउथ चाइना सी में अपनी दावेदारी को बहुत मजबूत करने की भी है। भारत का सेना पर होने वाले खर्च में से एक चौथाई हिस्सा तो पेंशन की रकम में ही खर्च होता है। बचे हुए पैसे में से दो चौथाई हिस्सा रोजमर्रा के खर्चे, वेतन और 15 लाख के करीब सैन्य बल के रख रखाव में रकम का इस्तेमाल होता है।


इस भारी भरकम रकम में से बहुत कम हिस्सा सेना के आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद के लिए खर्च होता है। करीब 4.6 लाख करोड़ रुपए के खर्चे में से सिर्फ एक चौथाई हिस्सा(25 फीसदी) ही
के आधुनिकीकरण, नई खरीद आदि पर खर्च होता है। भले ही भारत रूस को हटाकर डिफेंस पर खर्च करने वाला चौथा बड़ा देश बन गया हो लेकिन भारतीय सेना कई क्षेत्रों में आधुनिकीकरण और नई हथियारों की कमी से अभी भी जूझ रही है। सिपरी की ओर से जारी नए डेटा के मुताबिक वैश्विक स्तर पर डिफेंस पर किया जाने वाला खर्च 2018 में 2.6 फीसदी बढक़र 1,882 बिलियन डॉलर हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका(649 बिलियन डॉलर), चीन(250 बिलियन डॉलर),सऊदी अरब(67.6 बिलियन डॉलर), भारत(63.8 बिलियन डॉलर) और फ्रांस(63.8 बिलियन डॉलर)खर्च कर चुके हैं। सैन्य प्रसाधनों पर यह खर्च विश्व के कुल डिफेंस खर्च का 60 फीसदी है। सिपरी ने रिपोर्ट में यह भी बताया है कि किस देश ने किस मद में कितना खर्च किया है। 66.5 बिलियन डॉलर(4.6 लाख करोड़) की इस रकम में सैन्य कर्मियों को मिलने वाली पेंशन भी है।