अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच चीन तेजी से एक लंबी दूरी के स्टील्थ बॉम्बर पर काम कर रहा है। यह बॉम्बर प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकी नेवल बेस गुआम और आसपास के दूसरे सैन्य ठिकानों पर परमाणु हमला कर सकता है। हाल में ही चीन के स्टेट डिफेंस कॉर्पोरेशन नोरिन्को ने चीन के नए स्टील्थ स्ट्रैटजिक बॉम्बर जियान एच -20 की कंप्यूटर से बनी कुछ तस्वीरें जारी की है। इसमें वर्षों के बनाई जा रही युद्धक विमान की पहली झलक दिखाई गई है। 

इन तस्वीरों से पता चलता है कि चीन का यह बमवर्षक अमेरिका के बी-2 की हूबहू नकल है। इसमें हथियारों को रखने के लिए एक इंटरनल बे बना हुआ है। इसमें दो एडजस्टेबल टेल विंग और एक एयरबॉर्न रडार लगा हुआ है। इसके अलावा इस बॉम्बर में पायलटों के बैठने वाले कॉकपिट के दोनों साइड एक-एक एयर इंटेक भी बने हुए हैं। नोरिन्को मैगजीन ने इस तस्वीर को जारी करते हुए चीन के एच-20 को आकाश में युद्ध का देवता का नाम दिया है।

डिफेंस तकनीकी पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्लाइटग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपने एच-6 स्ट्रेटजिक बॉम्बर्स को हटाकर अब आधुनिक एच-20 स्टील्थ बॉम्बर को तैनात करने की योजना बना रहा है। कई विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि चीन का यह विमान भी उसके दूसरे अन्य विमानों की तरह तकनीकी की चोरी कर बनाया गया है। इस विमान के पैटर्न अमेरिका के बी-2 और बी-21 बॉम्बर्स से मिलते जुलते हैं।

बी-2 स्पिरिट दुनिया के सबसे घातक बॉम्बर माने जाते हैं। यह बमवर्षक विमान एक साथ 16 बी61-7 परमाणु बम ले जा सकता है। हाल ही में इसके बेड़े में बेहद घातक और सटीक मार करने वाले बी61-12 परमाणु बम शामिल किए गए हैं। यही नहीं यह दुश्मन के हवाई डिफेंस को चकमा देकर आसानी से उसके इलाके में घुस जाता है। इस बॉम्बर पर एक हजार किलो के परंपरागत बम भी तैनात किए जा सकते हैं। वर्ष 1997 में एक बी-2 स्पिरिट बॉम्बर की कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर थी। अमेरिका के पास कुल 20 बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर हैं। यह बॉम्बर 50 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए 11 हजार किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम है। एक बार रिफ्यूल कर देने पर यह 19 हजार किलोमीटर तक हमला कर सकता है। इस विमान ने कोसोवा, इराक, अफगानिस्तान और लीबिया में अपनी क्षमता साबित की है।