भारत के पास अब ऐसी स्वदेशी किलर मशीन आ चुकी है जिसको लेकर चीन और पाकिस्तान घबराए हुए हैं। यह किलर मशीन कोई और नहीं बल्कि HAL का बनाया गया लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर है जिसको हाल ही में वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने उड़ाया था। उनकी ये उड़ान इसलिए खास है क्योंकि इसी साल अगस्त में LCH को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तैनात किया जा चुका है। एक्सपर्ट्स के अनुसार हाई ऑल्टीटियूड वॉरफेयर में LCH अपाचे से भी ज्यादा प्रभावी हैं।

वायु सेना के मुताबिक ये यह दुनिया का सबसे हल्का अटैक हेलीकॉप्टर है। इसकी ताकत का नमूना सियाचिन में लैंडिंग के साथ दिख गया था जो काम दुनिया का सबसे एडवांस्ड हेलीकॉप्टर अपाचे नहीं कर सकता वो LCH ने कर दिखाया था। इसके लगभग 3 महीने बाद वायु सेना प्रमुख की इस उड़ान ने दुनिया को ये बता दिया है कि आने वाले समय में ये लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर आधिकारिक तौर पर भारतीय वायु सेना का हिस्सा होंगे।

भारत के पास इस वक्त मौजूद अमेरिका का एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर दुनिया में सबसे आधुनिक तो है, लेकिन LCH ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों यानी कि हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर में जंग लड़ने के लिए अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर से ज्यादा घातक है। हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर में LCH की रेंज ज़्यादा लंबी है। लद्दाख बॉर्डर 18000 फीट तक की ऊंचाई पर भी है। ऐसे इलाकों और बर्फीले मौसम में रोटरी विंग्स वाले अपाचे को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन बेहद लाइट यानि हल्का होने और खास रोटर्स होने के चलते एलसीएच इतनी ऊंची चोटियों पर भी अपने मिशन को अंजाम दे सकता है।

LCH 2015 में सियाचिन के कई टेस्ट में 500 किलोग्राम के हथियार ले जाने में कामयाब रहा था। अपाचे की तुलना में कम वज़न के हथियारों से लैस LCH ऐसी भौगोलिक चुनौतियों और खराब मौसम वाली स्थितियों में भी दुश्मन को खत्म करने का दम रखता है। LCH दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर हैं, जो भारतीय सेना की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर विशेष रूप से बनाए गए हैं। इसलिए जब-जब दुश्मन पूरब या पश्चिम की इन आसमानी ऊचाइयों पर चढ़ कर भारत पर वार करने की सोचेगा तब-तब उसके हर इरादे को LCH खाक में मिला देंगे।