चीन कथित तौर पर गुप्त रूप से ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है। इन मिसाइलों को चीन शिपिंग कंटेनरों में छिपा सकता है ताकि उनकी दुनियाभर के बंदरगाहों में तस्करी की जा सके. साथ ही उन्हें बिना किसी चेतावनी के लॉन्च किया जा सके। 

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के महासागरों में चीन के विशाल जहाजों के बेड़े मौजूद हैं। कुछ पश्चिमी पर्यवेक्षकों का मानना है कि चीन द्वारा इन मिसाइलों का विकास युद्धपोतों का एक नया बेड़ा हासिल करने के समान है. ये कंटेनर सामान्य कंटेनरों की तरह दिखाई पड़ते हैं, ऐसे में इन्हें अन्य कंटेनरों के साथ रखकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा सकता है। 

वहीं, चीन इन मिसाइलों को दुश्मन के बंदरगाहों पर पहुंचाकर चौंका देने वाला हमला कर सकता है। इंटरनेशनल असेसमेंट एंड स्ट्रैटेजी सेंटर के रिक फिशर ने कहा कि इस बात की संभावना है कि चीनियों के पास स्टील्थ मिसाइलें हैं। अमेरिका और चीन आर्थिक और सैन्य दोनों तरह से दुनिया की शीर्ष महाशक्ति बनने की होड़ में हैं. ताइवान के भविष्य को लेकर दोनों मुल्कों के बीच तनाव बना हुआ है। जहां चीन ताइवान पर कब्जा जमाने के इरादे से बैठा हुआ है तो अमेरिका ने कसम खाई है वह ताइवान की बीजिंग से रक्षा करेगा। 

चीन की दुनियाभर में इस बात को लेकर निंदा की गई है कि वह डिटेंशन शिविरों में 10 लाख से अधिक उइगर मुस्लिमों के साथ दुर्रव्यवहार कर रहा है।  हालांकि, बीजिंग ने इन आरोपों को नकार दिया है। नई मिसाइलों का एक प्रोटोटाइप 2016 के आर्म्स फेयर में देखा गया था। तभी से इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि अब उन्हें सक्रिय रूप से तैनात किया जा सकता है।  फिशर ने कहा, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अपनी इच्छा के मुताबिक अराजकता पैदा करने के लिए कंटेनरीकृत मिसाइलों का उपयोग करने में पूरी तरह सक्षम है। 

एक कंटेनर जहाज से मिसाइल दागने का एकमात्र सार्वजनिक रिकॉर्ड इजरायल द्वारा किए गए टेस्ट की एक तस्वीर है। इस बीच, स्टॉकटन सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ के थिंक-टैंक ने कहा कि असैन्य जहाजों पर गुप्त रूप से हथियार लोड करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि चीन के मिसाइलों को व्यापारिक जहाजों में गुप्त रूप से छिपाने की वजह से नागरिक जहाजों पर खतरा बढ़ जाता है।