भारत के बाद अब चीन जापान से भिड़ गया है जिसकी वजह से एशिया महाद्वीप में कभी महायुद्ध छिड़ सकता है। गौरतलब है कि हाल ही में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। पूरे एशिया में यह जगह वर्तमान समय में सैन्य फ्लैश प्वाइंट बना हुआ है। इस बीच सैन्य विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि विस्तारवादी मानसिकता को संजोने वाला चीन अब पूर्वी चीन सागर में भी जापान के साथ द्वीपों को लेकर उलझ सकता है। अगर जापान से चीन ने बैर मोल लेने की कोशिश की तो इसमें अमेरिका जरूर शामिल होगा।
चीन और जापान दोनों ही इन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं। जिन्हें जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है। इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है। वहीं, चीन का दावा है कि ये द्वीप उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं और जापान को अपना दावा छोड़ देना चाहिए। इतना ही नहीं चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तो इस पर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई तक की धमकी दे चुकी है।
सेनकाकू या डियाओस द्वीपों की रखवाली वर्तमान समय में जापानी नौसेना करती है। ऐसी स्थिति में अगर चीन इन द्वीपों पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो उसे जापान से युद्ध लड़ना होगा। हालांकि दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी सैन्य ताकत वाले चीन के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा। पिछले हफ्ते भी चीनी सरकार के कई जहाज इस द्वीप के नजदीक पहुंच गए थे जिसके बाद टकराव की आशंका भी बढ़ गई थी।
जापान और अमेरिका में 19951 में सेन फ्रांसिस्को संधि है जिसके तहत जापान की रक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की है। इस संधि में यह भी बात लिखी है कि जापान पर हमला अमेरिका पर हमला माना जाएगा। इस कारण अगर चीन कभी भी जापान पर हमला करता है तो अमेरिका को इनके बीच आना पड़ेगा। यह सर्व विदित है कि अगर जापान के साथ अमेरिका ने मिलकर चीन पर हमला कर दिया तो तीसरा विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है।
इन द्वीपों के पास चीन की बढ़ती उपस्थिति के जवाब में जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशीहिदे सुगा ने इन द्वीपों को लेकर टोक्यो के संकल्प को फिर से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सेनकाकू द्वीप हमारे नियंत्रण में हैं और निर्विवाद रूप से ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हमारा है। अगर चीन कोई हरकत करता है तो हम उसका जवाब देंगे।
जापान के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि डियाओस और उससे लगे हुए अन्य द्वीप चीन का अभिन्न हिस्सा हैं। जिसके कारण हमारा यह अधिकार है कि हम इन द्वीपों के पास पेट्रोलिंग और चीनी कानूनों को लागू करें।