इस चीन का पूर्वी और दक्षिणी हिस्‍सा सुलग रहा और एक छोटी सी चिन्‍गारी युद्ध के आग को भड़का सकती है। इस तनाव के दो केंद्र बिन्‍दू हैं जिनमें पहला-ताइवान और दूसरा भारत है। माना जा रहा है कि लद्दाख और ताइवान में चल रहा यह तनाव जंग में तब्‍दील हो सकता है जिसमें अमेरिका भी हिस्‍सा ले सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका और चीन दोनों ही परमाणु हथियार संपन्‍न राष्‍ट्र हैं, इसलिए सीधे जंग की संभावना कम है लेकिन छोटे स्‍तर पर सैन्‍य झड़प हो सकती है।
कहा जा रहा है कि चीन और अमेरिका के बीच विवाद का मुख्‍य विषय शक्ति के लिए प्रतिस्‍पर्द्धा है और जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच ताकत का फर्क कम होगा और ज्‍यादा कड़ी प्रतिस्‍पर्द्धा होगी। अमेरिका के साथ तनाव के बीच चीन अपने पड़ोसी देशों भारत और ताइवान के साथ तनाव क्‍यों भड़का रहा है, इस सवाल पर विश्‍लेषकों की राय कुछ हटकर है।
विश्‍लेषकों का कहना है कि चीन को हॉन्‍ग कॉन्‍ग और शिनजियांग क्षेत्र में असुरक्षा की भावना, दुनिया की महाशक्ति बनने की चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की महत्‍वाकांक्षा और कोरोना वायरस महामारी से मिला मौका चीन को पड़ोसियों के साथ शक्ति प्रदर्शन को प्रेरित कर रहा है। यही नहीं चीन इस समय कई मोर्चों पर खतरा और दबाव महसूस कर रहा है और शी जिनपिंग अगर सभी मुद्दों का सही ढंग से हल नहीं करते हैं तो उन पर आंतरिक रूप से दबाव बढ़ सकता है। चीन की यह आक्रामकता पीएलए की बढ़ती क्षमता की वजह से और तेज हो गई है।