लद्दाख में सीमा विवाद के बीच भारत के सख्त रवैए के बाद चीन की सेनाएं लाइन ऑफ कंट्रोल से पीछे तो चली गई हैं, लेकिन चीन अभी भी अपनी चालाकी से बाज नहीं आ रहा है। एक ओर एलएसी पर तनाव दूर करने के लिए आज से मिलिट्री बातचीत का एक और दौर शुरू हो रहा है। वहीं पैंगोंगे त्‍सो झील के उत्‍तरी किनारे पर दोनों सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं, वहां अब भी हालात पहले जैसे ही हैं। यहां भारत-चीन की सेनाएं अब भी आमने सामने है। मई के शुरुआती दिनों में भारत की पैट्रोलिंग को ब्‍लॉक करने के लिए चीनी सैनिकों ने उत्‍तरी किनारे पर फिंगर 4 से 8 तक का पूरा इलाका कब्‍जा लिया था। हालांकि गलवान घाटी और गोगरा से चीनी सैनिक पीछे हट गए हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि गलवां घाटी के झड़प वाली जगहों (पैट्रोलिंग पॉइंट 154 और 15) से 'सीमित संख्‍या में दोनों तरफ से सैनिकों ने कदम वापस लिए' हैं। इसके अलावा पिछले दो दिन में गोगरा से भी सैनिक पीछे हटे हैं। यह साफ संकेत है कि हिमालयन क्षेत्र में अब वाकई में तनाव खत्‍म होने जा रहा है। इन साइट्स पर दोनों देशों की सेनाएं युद्ध के साजोसामान के साथ आमने-सामने थीं। दोनों 'करीब एक से दो किलोमीटर' पीछे हटी हैं।

पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने इन इलाकों से करीब 20 गाड़‍ियां वापस बुलाई हैं। हालांकि ये पर्याप्‍त नहीं है क्‍योंकि वे पहले आए थे। उन्‍हें और पीछे हटाना होगा।' चीनी सैनिक LAC पार करते हुए 3 किलोमीटर तक घुस आए थे। साथ ही अपने इलाकों में टैंक और आर्टिलरी गन्‍स के साथ 5 से 7 हजार सैनिक तैनात कर दिए थे। भारत ने थोड़ी देर से ही सही, मगर चीन के जवाब में उतनी ही स्‍ट्रेन्थ के साथ खूंटा गाड़ दिया है।