स्पेस वॉर की नई कहानी लिखी जा रही है। इस बार कहानी में अमरीका के सामने रूस नहीं बल्कि उसका नया प्रतिद्वंदी चीन खड़ा है। चीन धरती के साथ अंतरिक्ष में भी अपना परचम लहराने को बेताब दिख रहा है इसीलिए ऐसे घातक हथियारों के निमार्ण जुट गया है, जिससे अमरीका के सैटेलाइट्स पर हमला किया जा सके। 

दरअसल ड्रैगन अमरीका की अभेद आंख कहे जाने वाले खुफिया सैटेलाइट्स को नष्ट कर उसे दृष्टिहीन करना चाहता है। इस तरह वह अंतरिक्ष में अपनी पकड़ मजबूत बनाना चाहता है। हाल ही जारी नई खुफिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ओडीएनआई) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने जमीन पर आधारित मिसाइलें तैनात की हैं जो पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थित सैटलाइट्स को निशाना बना सकती हैं। साथ ही जमीन पर एंटी सैटेलाइट (ए-सैट) लेजर एलईओ सैटेलाइट में लगे ऑप्टिकल सेंसर को खराब कर सकती हैं।

जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में चीन-रूस जैसे प्रतिद्वंदियों से कोरोना महामारी, जलवायु में बदलाव, आतंकी संगठन और हथियारों जैसे खतरे का आंकलन किया गया है। इसमें चीन को सबसे अहम रणनीतिक प्रतिद्वंदी बताया गया है। इसमें कहा गया कि चीन तेजी से अमरीका को आर्थिक, सैन्य और तकनीकी चुनौती दे रहा है और वैश्विक तरीकों को बदलने पर जोर दे रहा है। साथ ही चीन ने अपनी सेनाओं को अमरीकी सैटलाइट्स के खिलाफ हमला करने के लिए तैयार रहने को कहा है। दावा किया जा रहा है कि चीन अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमरीका को पीछे छोड़ेने के मंसूबे पाले हुए ताकि उसे भी सैन्य और आर्थिक फायदे मिल सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन विश्व में अपना डंका बजवाना चाहता है इसके लिए वह यह सब कर रहा है। उससे साइबर जासूसी का खतरा भी बढ़ा है।

दूसरी ओर भारत ने भी अंतरिक्ष में अपनी शक्ति दिखाना करवाना शुरू कर दिया है। भारत ने मार्च 2019 में एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुनिया को चकित कर दिया था। भारतीय मिसाइल ने प्रक्षेपण के तीन मिनट के भीतर ही धरती के लोअर अर्थ ऑर्बिट में मौजूद एक निष्क्रिय सैटेलाइट को नष्ट कर अपनी ताकत का अहसास करवा दिया था।