छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को कहा कि उनका प्रदेश अनाज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है तथा राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना और मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना लागू करने के साथ ही छत्तीसगढ़ मिलेट मिशन का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यहां नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की सातवीं बैठक में बघेल ने बैठक से संबन्धित एजेंडा बिन्दुओं के अतिरिक्त राज्यहित से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में नीति आयोग ने छत्तीसगढ़ के जिलों के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की है , लेकिन राज्य में संसाधनों की समस्याएँ अभी भी हैं और इनका समाधान किया जाना चाहिए। 

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उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण एवं दलहल, तिलहन की उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवीन विकसित फसल किस्मों के निशुल्क बीज मिनी किट एवं ब्रीडर सीड बड़े पैमाने पर कृषि अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में गोधन न्याय योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि, गोबर से तैयार हो रहे वर्मी कम्पोस्ट खेतों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है तथा यह किसानों के हित में बेहतर योजना है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट अँग्रेजी माध्यम स्कूल की स्थापना सहित अच्छी गुणवत्ता की अधोसंरचना, उपकरण, शैक्षिक तथा पाठ्यसहगामी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। 

नगरीय प्रशासन पर चर्चा करते हुए बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लगातार तीन वर्षों से राज्य स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल स्थान हासिल किया है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में बेहतर कार्य किए गए हैं। उन्होंने शहरों के निकट स्थित ग्रामीण क्षेत्रों एवं 20 हजार से कम आबादी के शहरों में मनरेगा लागू किये जाने का सुझाव भी दिया। मुख्यमंत्री ने बैठक में जीएसटी क्षतिपूर्ति का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि जीएसटी कर प्रणाली से राज्यों को राजस्व की हानि हुई है। आगामी वर्ष में राज्य को लगभग 5000 करोड़ के राजस्व की हानि की भरपाई की व्यवस्था केंद्र द्वारा नहीं की गयी है, इसलिए जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान को जून 2022 के पश्चात भी आगामी पांच वर्षों के लिए जारी रखा जाये। 

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वहीं विगत तीन वर्षों के केन्द्रीय बजट में छतीसगढ़ को केन्द्रीय करों में हिस्से की राशि 13,089 करोड़ कम प्राप्त हुए हैं , जिससे राज्य के संसाधनों पर अत्यधिक दबाव की स्थिति निर्मित हुई है। उन्होंने केन्द्रीय करों के हिस्से की राशि पूर्णत: राज्य को दिये जाने की मांग की। श्री बघेल ने कोल ब्लॉक कंपनियों से कोल उत्खनन पर 295 रुपये प्रति टन के हिसाब से केंद्र के पास जमा राशि 4,140 करोड़ छत्तीसगढ़ को शीघ्र देने की मांग की। उन्होने कहा कि राज्य का लगभग 65 प्रतिशत खनिज राजस्व का स्रोत प्रदेश में संचालित लौह अयस्क खानें है। रॉयल्टी दरों में संशोधन राज्य के वित्तीय हित आवश्यक है। उन्होंने कोयला एवं अन्य मुख्य खनिजों की रॉयल्टी की दरों में संशोधन का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा पर होने वाला व्यय केंद्र शासन द्वारा वहाँ किया जाना चाहिए। नक्सल उन्मूलन के लिए राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती पर हुये सुरक्षा व्यय 11 हजार 828 करोड़ रुपये को केंद्र सरकार द्वारा वहन करते हुये राज्य को इस बकाया से मुक्त किया जाए। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के वनांचल के 10 जिलों में पांच मेगावाट तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में वन संरक्षण अधिनियम के तहत छूट देने का भी आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होने नवीन पेंशन योजना में जमा राशि की वापसी, जूट बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करने सहित अन्य लंबित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का अनुरोध किया।