मां दुर्गा के सभी साधकों को 32 नाम वाले मंत्र का पाठ भी महत्त्वपूर्ण माना गया है, जो परम कल्याणकारी है।  इस मंत्र को नियम पूर्वक विधि-पाठ किया जाना चाहिए।  इसे 108 बार नित्य पाठ करना है।  जब तक देवी कृपा न प्राप्त हो।  इसके बाद भी अगर 11,21,32,51 पाठ नित्य किया जाए तो जिंदगी में कोई समस्या आ नही सकती। हर तरह से कल्याण होता है। 

2 माला रात में किया जाने वाला मंत्र इसे ओम ह्रीं पहले और अंत में ह्रीं ओम लगा कर जाप करना है। 

ऐसे ओम ह्रीं सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि .

एवमेव त्वया कार्यमस्यद्वैरिविनाशनम्‌ ह्रीम ओम..

अथ “श्री दुर्गा बत्तीस नामवली” स्त्रोत :-

दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी.

दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी

दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी

दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता

दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी

दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी

दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी