मोदी सरकार ने एक साल में एक लिमिट से ज्यादा के कैश निकालने पर 2 फीसदी स्रोत पर कर कटौती (TDS) लगाया है। एक सितंबर 2019 से कैश विदड्रॉल में लेन-देन के नियम बदल गए हैं। इसका मतलब अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में एक करोड़ रुपए से अधिक कैश अपने बैंक, पोस्ट ऑफिस या को-ऑपरेटिव बैंक के खाते से निकलता है तो उसे 2% TDS देना होगा। ये कदम कैशलेस इकॉनमी बढ़ावा और बड़े नकद लेनदेन को रोकने के लिए उठाया गया है।


1 सितंबर से साल में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद लेनदेन पर 2 फीसदी टीडीएस कटेगा। ये फैसला एक सितंबर से लागू हो गया। नकद लेनदेन कम करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है।


अगर कोई व्यक्ति 31 अगस्त 2019 से पहले ही अपने बैंक खातों, डाक घर खातों और सहकारी बैंक खातों से 1 करोड़ अथवा इससे अधिक नकद निकासी कर चुका है तो उनसे कोई TDS नहीं वसूला जाएगा। लेकिन इसके बाद के सभी बड़े विदड्राल पर 2 फीसदी TDS लगेगा।


यह नियम सरकार, बैंकिंग कंपनी, बैंकिंग में लगी सहकारी समिति, डाकघर, बैंकिंग प्रतिनिधि और व्हाइट लेबल एटीएम परिचालन करने वाली इकाइयों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि व्यवसाय के तहत उन्हें भारी मात्रा में नकद का इस्तेमाल करना होता है।


आपको बता दें कि वित्त मंत्री ने लोकसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 में 448 कंपनियां ऐसी रहीं, जिन्होंने बैंक खातों से 5.56 लाख करोड़ रुपये की राशि की नकद निकासी की है। यही वजह है कि सरकार को बैंक खाते से साल में एक करोड़ रुपये से अधिक की निकासी करने वाले व्यक्तियों और इकाइयों पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लगाना पड़ा है। उपरोक्त 448 इकाइयों के मामले में प्रत्येक ने अपने बैंक खातों से साल में 100-100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाली।


आज से अगर कोई व्यक्ति या एचयूएफ किसी ठेकेदार अथवा प्रोफेशनल व्यक्ति को साल भर में किसी सेवा के लिए 50 लाख का भुगतान करता है तो उसे 5 प्रतिशत टीडीएस देना होगा। यह उन लोगों पर असर डालेगा, जो घर बनवाते समय या फिर शादी के लिए किसी एक व्यक्ति को ही सारा भुगतान करते हैं।