साल 2020 का पहला चंद्रग्रहण माघ शुक्ल पूर्णिमा पर 10 जनवरी को होगा। रात 10 बजकर 30 मिनट पर यह ग्रहण शुरू होगा, जो मध्य रात्रि बाद 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। मध्यरात्रि 12 बजकर 40 मिनट पर ग्रहण चरम पर रहेगा, जिसमें चन्द्रमा का 85 प्रतिशत भाग उपछाया से ढक जाएगा। यह चंद्रग्रहण भारत सहित एशिया के सभी देशों और यूरोप, अटलांटिक महासागर, अफ्रीका, उत्तरी अमरीका तथा ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस ग्रहण का कोई सूतक आदि नहीं लगेगा। 

चांद धुंधला, सूतक नहीं लगेगा

पंडित बंशीधर ज्योतिष पंचांग के ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि यह मांद्य चन्द्रग्रहण होने से यह ग्रहण चन्द्रमा को धुंधला ही कर पाएगा। चन्द्रमा की कला में कोई कमी नहीं आएगी। ग्रहणकाल के दौरान चन्द्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरेगा। ऐसे में यह ग्रहण की श्रेणी में नहीं आने से सूतक आदि नहीं लगेंगे।

खुली आंखों से देख सकेंगे

सम्राट पंचांग के ज्योतिषाचार्य चन्द्रशेखर शर्मा ने बताया कि यह चंद्रग्रहण खुली आंखों या दूरबीन से देखा जा सकेगा, इसका कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। चन्द्रमा और पृथ्वी का कक्षीय तल 5 अंश 9 कला डिग्री पर झुके होने से ग्रहण 100 प्रतिशत नहीं होगा। यह ग्रहण वैसा नहीं है, जिसे आसानी से देखा जा सकता है।

चंद्रमा की कला में नहीं आएगी कोई कमी

इसमें चंद्रमा घटता-बढ़ता नहीं दिखाई देगा, सिर्फ चंद्रमा के आगे धूल की एक परत-सी छा जाएगी। इस कारण ज्योतिषीय मत में चंद्रग्रहण का कोई असर नहीं होगा। इसके चलते मांद्य चंद्र ग्रहण होने से सूतक नहीं रहेगा। ग्रहण काल में पूजा-पाठ आदि कर्म किए जा सकेंगे।

11 फरवरी, 2017 को हुआ था ग्रहण

ज्योतिषाचार्य नरोत्तम पुजारी ने बताया कि साल 2020 से पहले ऐसा चंद्रग्रहण 11 फरवरी, 2017 को दिखा था। अब 10 जनवरी की रात होने वाला चंद्रग्रहण मिथुन राशि के पुनर्वसु नक्षत्र में होगा। बड़ी बात यह रहेगी कि यह चंद्रग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से खास रहेगा। इससे पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद प्रदूषण की मात्रा का पता चल पाएगा। मांद्य चंद्रग्रहण में सूर्य का कुछ प्रकाश पहुंचता है, जिससे पृथ्वी की पूर्ण छाया नहीं होती है।

किसे कहते हैं मांद्य चंद्रग्रहण

मांद्य का अर्थ है, न्यूनतम यानी मंद होने की क्रिया। इसलिए इस चंद्रग्रहण पर सूतक नहीं रहेगा। इसका किसी भी तरह का धार्मिक असर नहीं होगा। इस ग्रहण में चंद्र की कांति हल्की-सी मलीन हो जाएगी। लेकिन चंद्रमा का कोई भी भाग ग्रहण ग्रस्त होता दिखाई नहीं देगा। इस ग्रहण में चंद्रमा का करीब 90 प्रतिशत भाग धूसर छाया में आ जाएगा। धूसर छाया यानी मटमैली छाया या हल्की-सी धूल वाली छाया। इस प्रभाव को भी बहुत कम ही लोग समझ पाएंगे। ये ग्रहण विशेष उपकरणों से आसानी से समझा जा सकेगा।

नहीं पड़ेगी चांद पर राहु की छाया

ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार इस ग्रहण में चंद्रमा पर राहु की छाया नहीं पड़ेगी। राहु एक छाया ग्रह है। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में चंद्र पर छाया के रूप में राहु दिखता है, लेकिन इस ग्रहण में छाया नहीं बनेगी। जब छाया ही नहीं पड़ेगी तो राहु के ग्रसने वाली बात भी नहीं होगी। यह ग्रहण केवल उपच्छाया मात्र है।

2020 में होंगे 6 ग्रहण

इस साल 4 चंद्रग्रहण होंगे। ये चारों ही ग्रहण मांद्य चंद्रग्रहण रहेंगे। 10 जनवरी वाला ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। इसके बाद तीन अन्य चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखेंगे। दूसरा ग्रहण 5 जून को होगा। तीसरा 5 जुलाई को और चौथा 30 नवंबर को होगा। 2020 में दो सूर्यग्रहण होंगे। पहला सूर्यग्रहण 21 जून को होगा। ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इस ग्रहण का सूतक भारत में रहेगा। इसके बाद साल के अंत में 14 दिसंबर को सूर्यग्रहण होगा, जो भारत में नहीं दिखेगा।

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