कोरोना के खौफ के बीच चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुके हैं, ऐसे में कलश स्थापना करते समय कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हर साल की तरह इस बार भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से नवरात्रि का पर्व शुरू हो जाता है। नौ दिनों तक चलने वाली मां की आराधना का ये दिन इस बार 25 मार्च यानि आज से शुरू हो रहा है। हालांकि इस बार कोरोना वायरस के कहर के चलते नवरात्रि का जोश लोगों में कम है, लेकिन घर में रहकर आप पूजा-पाठ कर सकते हैं। चूंकि आज नवरात्रि का पहला दिन है इसलिए कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। तो किस तरह रखें कलश और क्या है पूजा के नियम आइए जानते हैं।

1.चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ 24 मार्च की रात 2:57 मिनट से हुआ, जो अगले दिन यानी 25 मार्च को शाम 5:26 मिनट तक रहेगा। इसलिए आज सूर्योदय के बाद से ही पूजा का शुभ समय आरंभ हो गया है। इस दौरान घर में कलश स्थापित करने से देवी मां की आप पर कृपा बनेगी।

2.कलश स्‍थापित करने का सबसे उत्तम समय सुबह 5 बजे से 6:30 तक है। इसके बाद सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:45 मिनट तक के बीच कलश स्‍थापना की जा सकती है। अगर किसी कारणवश इन शुभ मुहूर्त में आप कलश नहीं रख पाए हैं तो वे शाम में 3:30 मिनट पर यह शुभ कार्य कर सकते हैं।

3.कलश स्थापित करते समय नहाने के बाद सफेद या लाल रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में गंंगाजल लेकर ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्रोच्चारण के साथ इसे खुद पर छिड़के। इससे आप शुद्ध हो जाएंगे।

4.किसी भी व्रत में संकल्प लेना बहुत आवश्यक होता है। इसलिए दाएं हाथ की अनामिका में कुश धारण करें। अब हाथ में अक्षत, फूल, गंगाजल, पान, सिक्का और सुपारी लेकर देवी दुर्गा का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद इसे मां दुर्गा को अर्पण कर दें।

4.माता की चौकी सजाने के बाद उनके ठीक सामने कलश स्थापित करें। इसके लिए आप
मिट्टी, पीतल, तांबा या फूल का मटका या पात्र ले सकते हैं। इसे रखने से पहले जगह को साफ करके वहां हल्दी से स्वास्तिक का निशान बनाएं।

5.कलश में जौ, तिल, सप्तमृतिका, सर्वोषधि, शहद, लाल वस्त्र, कुमकुम, पानी वाला नारियल, दीप, रोली, सुपारी, गंगाजल, आम का पल्लव, सिक्का, पान का पत्ता रखें।
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6.अब माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं। अब दाहिने हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरुण देवता का आह्वान करें। कलश में सर्वऔषधी और पंचरत्न भी डालें।

6.कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर इसके ऊपर एक दीपक प्रज्जवलित करें। कलश में पांच आम के पत्तों वाला डंठल रखें।

7.कलश के ऊपर लाल वस्त्र लपेटकर एक जटावाला नारियल रखें। इस दौरान देवी दुर्गा का आवाहन करें।

9.कलश के नीचे मिट्टी में जौ के दानें फैलाएं और देवी मां का मंत्र खड्गं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:, शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम। नीलाश्मद्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम, यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥ पढें। इससे आपके घर में सुख—समृद्धि आएगी।

10.पूजा की शुरुआत करते हुए सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें। इसके बाद भगवान शिव और देवी दुर्गा का। इसके बाद मां भगवती की पूजा करके दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।