नई दिल्ली। केन्द्र सरकार असम में 6 समुदायों को अनुसूचित जनजाति(एसटी कैटेगरी) का दर्जा देने के लिए प्रतिबद्ध है और वह इस दिशा में काम कर रही है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस संबंध में असम सरकार और 6 समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक हुई थी। यह बैठक नॉर्थ ब्लॉक में हुई थी। 

बकौल रिजिजू, हम असम के 6 ओबीसी समुदायों को एसटी का दर्जा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रस्ताव के एग्जामिन के लिए पहले ही कमेटी गठित की जा चुकी है। कमेटी इस पर काम कर रही है। जिन 6 समुदायों को एसटी का दर्जा दिया जाना है उनमें मोरन,मुटॉक,ताई अहोम,कोच-राजबोंगशी,सुतीआ और टी ट्राइब्स शामिल हैं। भाजपा ने इन सभी को एसटी का दर्जा देने का वादा किया था। भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन पिछले साल सत्ता में आया था। 

उल्फा का प्रो-टॉक फैक्शन भी 6 समुदायों को एसटी का दर्जा देने की मांग कर रहा है। गृह मंत्रालय में स्पेशल सेक्रेटरी(आंतरिक सुरक्षा) रीना मित्रा की अध्यक्षता वाली कमेटी असम सरकार और सभी स्टेक होल्डर से विचार विमर्श कर रही है। कमेटी विभिन्न मसलों को एग्जामिन कर रही है। कहा जा रहा है कि कमेटी 30 जून तक केन्द्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर केन्द्र सरकार आगे बढ़ेगी। 

6 समुदायों को एसटी का दर्जा देने के बाद असम की 50 फीसदी आबादी आदिवासी हो जाएगी और असम आदिवासी बहुल राज्य बन जाएगा। 6 समुदायों को एसटी का दर्जा देने से राज्य की विधानसभा में एसटी की सीटों की संख्या भी बढ़ जाएगी। 126 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 16 विधानसभा सीटें एसटी के लिए रिजर्व है।