भारत में 17वीं लोकसभा का गठन हो चुका है। नरेंद्र मोदी पूर्ण बहुमत के साथ दूसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं। इस चुनाव के दौरान देश की जनता का मूड कैसा रहा, मुसलमानों की नरेंद्र माेदी और उनकी सरकार के प्रति क्या सोंच है? इस पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने असम का चुनावी किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि असम में मुसलमानों ने कहा कि मोदी को वोट देंगे, पर कमल को नहीं। बाद में उन्हें समझाया गया कि दोनों एक ही बात है।

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, चुनाव में असम में एक संसदीय क्षेत्र की स्थिति को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री ने मुझे बुलाया। उन्होंने कहा कि एक कठिन समस्या आ गई है। इस इलाके में मुस्लिम वोटरों की बहुलता है। उनका कहना है कि हम मोदी को वोट देंगे, लेकिन कमल पर नहीं देंगे। अब इनको समझाओ कि सब एक ही है। मैं वहां गया। वहां के लोगों से मिला। वहां के लोगों ने कहा कि हमें मोदी से कोई शिकायत ही नहीं है। हमारा मकान मोदी ने बनवाया है। किसान सम्मान निधि का पैसा मोदी जी ने दिया है। मुद्रा योजना के तहत पैसा मिला है, उससे दुकान खोले हैं।

मुसलमानों के लिए किए गए काम को लेकर केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, सभी मुसलमान एक बार अपनी जिंदगी में हज पर जाना चाहते हैं। पहले हज का कोटा एक लाख 30 हजार का था। मोदी जी से मैंने कहा कि आवेदन करीब 4 लाख आते हैं। आप सऊदी के किंग से बात करें। मोदी जी ने बात किया। पहली बार कोटे में 25 हजार की वृद्धि हुई। दूसरी बार फिर 25 हजार की वृद्धि हुई। वहां के जब क्राउंन प्रिंस भारत आए तो उस समय पीएम मोदी के आग्रह पर 2 लाख कोटा कर दिया गया। अब सिर्फ एक मुस्लिम देश इंडोनेशिया ही है, जहां का कोटा भारत से ज्यादा है। पाकिस्तान भी पीछे छूट गया है। अगली बार में इंडोनेशिया भी पीछे छूट सकता है। पत्रकार ने पूछा, डर मोदी जी से नहीं, योगी जी से है। लगातार शहरों का नाम बदल रहे हैं। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा, नाम बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। ये सांकेतिक चीजे हैं। काम होना चाहिए।