स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर राज्यों को आगाह किया है। हेल्थ सेक्रेटी राजेश भूषण ने  बताया कि वेक्सीनेशन के बाद होने वाले रिएक्शन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तैयार रहना होगा।

सरकार ने वैक्सीन के स्टोरेज के लिए जरूरी इंतजाम करने का दावा किया है। इसमें 29 हजार कोल्ड चेन प्वाइंट्स शामिल हैं। भूषण ने बताया, वैक्सीन के स्टोरेज के लिए 29 हजार कोल्ड चेन पॉइंट्स, 240 वॉक-इन-कूलर्स, 70 वॉक-इन-फ्रीजर्स, 45 हजार आइस-लाइंड रेफ्रिजरेटर्स, 41 हजार डीप फ्रीजर्स और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर्स का इस्तेमाल किया जाएगा।

यह सभी इक्विपमेंट राज्य सरकारों तक पहुंचा दिए गए हैं। उन्होंने बताया, वेक्सीन का रिएक्शन गंभीर मसला है। दुनियाभर में वैक्सीनेशन प्रोग्राम  लंबे समय तक चलता है। ऐसे में वैक्सीनेशन के बाद बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं में उसके साइड इफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। जिन देशों में वेक्सीनेशन शुरू हो चुका है, वहां इसके साइड इफेक्ट्स भी सामने आए हैं। 

खासकर ब्रिटेन, जहां वैक्सीन लगाने के बाद पहले दिन ही रिएक्शन के मामले देखे गए थे। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि राज्य इसके लिए पहले से ही पूरी तैयारी रखें। उन्होंने बताया कि देश में कोरोना के मामले लगातार घट रहे हैं। इस वक्‍त देश में 10 लाख पर सिर्फ 7 हजार 178 मामले सामने आ रहे हैं, जबकि दुनिया में यह आंकड़ा 9000 है। 

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि इस हफ्ते ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने एक और वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। एचजीको-19 नाम की यह वैक्सीन पुणे की कंपनी जेनोवा ने भारत सरकार की स्सिर्च एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के साथ मिलकर डेवलप की है। यह देश की पहली एमआईएन- टेक्नोलॉजी से बनी वेक्सीन है।

फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को ब्रिटेन में मंजुरी मिल चुकी है। एक और अमरीकी कंपनी मॉ्डर्ना ने भी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए एप्रुवल मांगा है। ये दोनों ही वैक्सीन मैसेंजर-आरएन- यानी एमआरएल- पर बेस्ड टेक्नोलॉजी पर डेवलप की गईं हैं और दोनों ही 95% तक इफेक्टिव भी हैं।

उन्होंने बताया, फाइजर या कुछ अन्य वैक्सीन के उलट, यह वेक्सीन सामान्य फ्रिज में, सामान्य कोल्ड चेन स्थितियों में रखी जा सकेगी। देश में इस समय 6 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रही हैं। उन्होंने बताया कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के लिए सरकार कोरोना के मद्देनजर हर तरह की सावधानी बरत रही है। डेमोक्रेटिक प्रक्रिया चलती रहनी चाहिए, लेकिन हमें कोरोना की गाइडलाइन का भी पालन करना होगा।