भारतीय प्रतिस्पद्र्धा आयोग (सीसीआई) ने डीलरों के ग्राहकों को गाड़ी की खरीद पर छूट देने से रोकने को प्रतिस्पद्र्धा नियमों के विपरीत पाते हुए आज देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) पर 200 करोड़ रुपये जुर्माना ठोका है। 

कंपनी मामलों के मंत्रालय से सोमवार को जारी आदेश में बताया गया है कि सीसीआई ने अपनी जांच में पाया कि एमएसआईएल अपनी छूट नियंत्रण नीति के तहत डीलरों के साथ के एक करार करती है, जिसके तहत डीलर ग्राहकों को कंपनी द्वारा निर्धारित छूट से अधिक छूट नहीं दे सकते हैं। साथ ही यदि डीलर अपने ग्राहकों को अतिरिक्त छूट देना चाहते हैं तो उसे पहले एमएसआईएल से अनुमति लेनी होगी। 

सीसीआई ने पाया कि यदि कोई डीलर कंपनी की छूट नियंत्रण नीति का उल्लंघन करता है तो एमएसआईएल न केवल डीलरों बल्कि विक्रय कार्यकारी, रीजनल प्रबंधक, शोरूम प्रबंधक एवं टीम लीडरों पर जुर्माना लगाने की धमकी भी देती है। कंपनी ने अपनी इस नीति को लागू करने के लिए डीलरों की जासूसी भी करवाती है। एमएसआईएल जासूस को ग्राहकों को वाहन खरीद पर अतिरिक्त छूट दिये जाने का पता लगाने के लिए डीलरों के पास ग्राहक बनाकर भेजती है। 

यदि कोई डीलर अतिरिक्त छूट की पेशकश करता है तो वह जासूस इसकी सूचना सबूत (ऑडियो-वीडिया) के साथ कंपनी प्रबंधन को देता है। कंपनी इन सबूतों के आधार पर डीलरों को ईमेल के माध्यम से मिस्ट्री शॉपिंग ऑडिट रिपोर्ट भेजकर स्पष्टीकरण मांगती है। जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में कंपनी डीलर के साथ ही उसके अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर जुर्माना ठोकती है। इतना ही नहीं वह डीलर को वाहनों की डिलीवरी नहीं करने की धमकी भी देती है। सीसीआई ने जांच में पाया कि एमएसआईएल की ऐसे गतिविधि से बाजार की प्रतिस्पद्र्धा प्रभावित हुई है।