कैमरों के जरिए तीन वर्षों तक किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि बर्फ से ढकी हुई अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बाघ मौजूद हैं। बता दें कि बाघ घाटी पर 3,630 मीटर की ऊंचाई पर देखे गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यह सबसे ऊंची जगह है, जहां पर जंगली बिल्लियों को देखा गया है। हालांकि, वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के वैज्ञानिक ऐशो शर्मा अधिकारीमयम यह मानते हैं कि बाघ पहाड़ों पर इससे भी ज्यादा ऊंचाई पर हो सकते हैं।


डब्ल्यूआईआई के लुप्तप्राय प्रजाति प्रबंधन विभाग के ऐशो शर्मा कहते हैं, 'इस बात की एक संभावना थी कि बाघ घाटी में 3,630 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर मौजूद हों, जैसे कि भूटान, जहां पर वर्ष 2012 में 4,200 मीटर की ऊंचाई पर बाघ की तस्वीर ली गई थी। दिबांग घाटी में में वाइल्ड लाइफ पर कई रिपोर्ट्स तैयार करने वाले लेखक अनवरुद्दीन चौधरी ने इनके संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चौधरी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि 4000 मीटर से ऊपर बाघ देखे जाने की साफ संभावना थी।


उत्तराखंड में 4000 मीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर बाघों को देखा गया है लेकिन इन दावों को सपोर्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं है। अधिकारीमयम और चौधरी के मुताबिक अगर बाघ भारत के पूर्वी हिमालय के हिस्से में 3,630 मीटर पर मौजूद हैं तो यह प्रजातियों के बारे में संरक्षणवादियों की जानकारी को और विकसित करेगा।


बता दें कि वर्ष 2015-17 में दिबांग वन्यजीव अभ्यारण्य (डीडब्ल्यूएस) के कुल 4,149 स्क्वेयर किलोमीटर क्षेत्र के 336 स्क्वेयर किलोमीटर में कैमरे के जरिए अध्ययन किया गया। इसका हिस्सा डब्ल्यूआईआई के साइंटिस्ट जीवी गोपी के साथ-साथ अधिकारीमयम भी थे। जर्नल ऑफ थ्रेटेंड टैक्सा में 26 नवंबर को प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में न सिर्फ फोटोग्राफिक एविडेंस के सहारे यह बात रखी गई थी कि 3,630 मीटर पर बाघ मौजूद हैं बल्कि डीडब्ल्यूएस में 11 बाघों के साथ दो शावकों को भी देखा गया। अध्ययन के मुताबिक, '336 किलोमीटर के क्षेत्र में कुल 108 कैमरे लगाए गए थे।'