नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बीती रात एक ऐसी केक बेकरी का पर्दाफ़ाश किया, जिसमें ड्रग्स का इस्तेमाल कर केक बनाया जा रहा था. इस मामले में एनसीबी ने एक सायकोलॉजिस्ट डॉक्टर को गिरफ़्तार किया है. इसके अलावा एक सप्लायर की भी गिरफ्तारी हुई है.

गिरफ़्तार डॉक्टर का नाम रहमिन चरमिया है, जिसकी उम्र महज़ 25 साल है, चरमिया अपने कॉलेज के दिनों से ही इस तरह से ड्रग्स बनाने की बेकरी चलाया करता था. एनसीबी के ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने बताया की हमें जानकारी मिली थी कि इस तरह से ड्रग्स का इस्तेमाल कर तीन तरह के केक बनाए जा रहे हैं, जिसे बड़ी बड़ी पार्टियों में सप्लाय किया जाता है.

उन्होंने कहा कि जानकारी मिलने के बाद मुंबई के माझगांव इलाके में ट्रैप लगाकर हमने इसकी दुकान में छापा मारा और आरोपी को कऱीब 10 किलोग्राम हशिश ब्राउनी के साथ गिरफ़्तार किया.

चरमिया ने बताया कि वो ड्रग्स से जुड़ी कई सीरीज़ देखा करता था, जिसमें ड्रग्स से जुड़ी नई नई चीजों के बारे में जानने को मिलता और फिर कैसे खुद को बचाया जाता है, यह भी पता चलता था जिसके बाद से ही इसने ड्रग्स का इस्तेमाल कर केक बनाना सीखा और बचना शुरू किया. चरमिया मुंबई के एक बड़े अस्पताल में बतौर साइकोलॉजिस्ट काम भी करता था. समीर वानखेड़े ने बताया की ये तीन तरह के केक बनाता था और ऑर्डर के हिसाब से उस ड्रग्स की डिलीवरी करता था.

इन नामों से बिकते थे केक 

1- रेंबो केक: इस केक को बनाने के लिए चरस, गंजा और हशिस का इस्तेमाल होता था, जिसके बाद यह काफ़ी नशीला हो जाता था.

2- हश ब्राउनी: इस केक को बनाने के लिए सिफऱ् हशीश का इस्तेमाल होता था.

3-पोट ब्राउनी: इस तरह के केक को बनाने के लिए वीड का इस्तेमाल किया जाता था.

समीर वानखेड़े ने बताया कि उसके ग्राहक काफी बड़े लोग हैं, जिनकी प्राइवेट पार्टी में इस तरह के केक की सप्लाय वह किया करता था. एनसीबी अब उसके सम्पर्क में कौन कौन था, इसकी जांच में जुट गई है. एनसीबी को इसके घर से 350 ग्राम अफ़ीम और 1.07 लाख रुपये नकद मिले हैं.

एनसीबी ने चरमिया को गिरफ़्तार करने के बाद जब पूछा कि इसे ये सारे ड्रग्स कहां से मिलते थे, तब उसने अपने ड्रग्स सप्लायर का नाम बताया और जिसके बाद एनसीबी ने ट्रैप लगाकर रमज़ान शेख़ नाम के ड्रग्स पेडलर को क्रोफर्ड़ मार्केट से गिरफ़्तार किया. एनसीबी को इसके पास से 50 ग्राम हशिश मिली है.

समीर वानखेड़े ने कहा कि ये ड्रग्स स्मोकिंग से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है. इसका इस्तेमाल करने वालों को 6 घंटों तक इसका नशा होता है. हाल ही में इसी तरह की एक और ड्रग्स केक की बेकरी का पर्दाफ़ाश एनसीबी ने किया था, जहां पर आरोपी एक रिहायशी इलाक़े में घर पर ही केक बनाते थे और फिर उसका ऑर्डर इंस्टाग्राम से लिया करते थे.