आगामी रबी सीजन की छह प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को सोमवार को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के मसले को लेकर देश में गरमाई राजनीति के बीच रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी कर सरकार किसानों की आशंका दूर करने की चेष्टा करेगी कि नए नए कानून से एमएसपी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बार-बार दोहराया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद पहले की तरह जारी रहेगी।

मोदी सरकार का दावा है कि कोरोना काल में लाए गए कृषि से जुड़े तीन अहम अध्यादेश किसानों के हित में है। इन तीनों अध्यादेशों की जगह संसद के चालू मानसून सत्र में लाए गए तीन विधेयकों में से दो को संसद की मंजूरी मिल चुकी है और तीसरे विधेयक को लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा की मुहर लगने का इंतजार है।

उन्होंने राज्यसभा में दोनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान रविवार को बताया कि वर्ष 2009-14 की तुलना में, पिछले पांच साल में दलहनी फसलों के लिए किसानों को एमएसपी भुगतान 75 गुना बढ़ा है। गत 5 साल में, 645 करोड़ रुपये के मुकाबले, 49,000 करोड़ रुपये एमएसपी का भुगतान किया गया है। इसी तरह वर्ष 2009-14 की तुलना में, पिछले पांच वर्षों के दौरान तिलहनों व कोपरा के किसानों के लिए एमएसपी भुगतान 10 गुना बढ़ा है। पिछले 5 साल में, 2460 करोड़ रुपये के मुकाबले 25,000 करोड़ रुपये एमएसपी भुगतान किया गया। तोमर ने बताया कि इस साल रबी-2020 में गेहूं, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर किसानों को एक लाख 13 हजार करोड़ रुपये एमएसपी के रूप में भुगतान किया गया। यह राशि पिछले साल की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा है।