गुवाहाटी । घर-जमीन की खरीद-फरोख्त करने के लिए आवेदन करने वाले को अब संबंधित जिला उपायुक्त कार्यालय द्वारा 30 दिन के अंदर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करना होगा। हाल ही में एक जनहित याचिका (पीआईएल)  पर सुनवाई करते हुए गुवाहाटी उच्च  न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन. कोरेश्वर सिंह और न्यायाधीश मनीष चौधरी की खंडपीठ ने यह निर्देश जारी किया है। 

मालूम हो कि घर-जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए जरूरी एनओसी को हासिल करने के लिए आम लोगों  को संबंधित जिला उपायुक्त कार्यालय के चक्कर पर चक्कर लगाने पड़ते हैं।

 

पंजीयन (असम संशोधन) कानून- 2009 की 21ए धारा के अनुसार आवेदन करने के 30 के दिनों के अंदर आवेनकारी  को एनओसी जारी कर देनी जानी चाहिए और यदि तय समय में 'एनओसी जारी नहीं हो पाती है तो जिला उपायुक्त कार्यालय को एनओसी जारी क्‍यों नहीं हो पाई इसकी व्याख्या  करते हुए एक निर्देश जारी सामना करना पड़ता मगर, लंबे समय से ऐसे आरोप लग रहे थे कि इन सारे नियमों को ताक पर रखते सम्बंधित विभाग द्वारा छह-सात महीने अथवा साल भर तक  एनओसी जारी नहीं की जाती। 

इस लेट-लतीफी के कारण जहां एक ओर क्रेता-विक्रेताओं को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ,वहीं दूसरी   ओर सरकार को घर-जमीन की खरीद- फरोख्त के नाम पर मिलने वाले राजस्व से भी हाथ धोना पड़ता है। 

 इस स्थिति पर न्यायालय का ध्यान  आकर्षित कराने के लिए डिब्रुगढ़ के मनोज बर्मन, हिमाद्र बोरा, स्मृतिरेखा फूकन, अब्दुल खालेक और चंद्रप्रकाश शर्मा ने न्यायालय में एक पीआईएल  (18/2020) दायर की थी। इसी पर  सुनवाई करते  हुए न्यायालय ने कहा कि आवेदन के 30 दिनों के अंदर एनओसी जारी करना उपायुक्त की जिम्मेदारी है। 

यदि 30 दिनों के भीतर एनओसी जारी नहीं होती है तो उपायुक्त को इसके कारणों की व्याख्या करते हुए एक निर्देश जारी   करना चाहिए। आवेदनकारियों की ओर से अधिवक्ता शांतुनु बरठाकुर और असम सरकार को ओर से अतिरिक्त वरिष्ठ सरकारी अधिवक्ता तरुण चंद्र सुतिया ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क रखे। सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के राजस्व (पंजीयन) विभाग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उपायुक्त अदालत की राय पर अमल करें।