नई दिल्ली। अपने सपनों का घर बनाने का अभी सबसे अच्छा मौका है। डीजल-पेट्रोल की कीमतों में कमी, स्टील के एक्सपोर्ट पर ज्यादा टैक्स और बारिश का मौसम जैसे फैक्टर मिलकर सस्ते में घर बनाने का बढ़िया संयोग बना रहे हैं। यह संयोग इतना बढ़िया है कि घर बनाने में इस्तेमाल होने वाले सारे जरूरी सामान के भाव गिरे हुए हैं। न सिर्फ सरिया का भाव रिकॉर्ड हाई से टूटकर नीचे आया है, बल्कि सीमेंट से लेकर रेत और ईंट तक सस्ते हो गए हैं।

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सरकार ने स्टील पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। इसके कारण घरेलू बाजार में स्टील के उत्पादों के दाम तेजी से गिरे हैं। सरिया की कीमतों में आई कमी की भी मुख्य वजह यही है। गिरावट का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि अप्रैल में एक समय सरिया का खुदरा भाव 82 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया था, जो अभी कम होकर 62-63 हजार रुपये प्रति टन पर आ गया है। अभी ब्रांडेड सरिया का भाव भी कम होकर 92-93 हजार रुपये प्रति टन पर आ गया है। एक महीने पहले इनका भाव 98 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया था।

सरिया की खुदरा कीमत (रुपये प्रति टन):

नवंबर 2021 : 70000

दिसंबर 2021 : 75000

जनवरी 2022 : 78000

फरवरी 2022 : 82000

मार्च 2022 : 83000

अप्रैल 2022 : 78000

मई 2022 (शुरुआत) : 71000

मई 2022 (अंतिम सप्ताह): 62-63000

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बाजार में सीमेंट का भाव भी पिछले दो-तीन सप्ताह में 60 रुपये तक कम हुआ है। बिड़ला उत्तम सीमेंट की एक बोरी पहले 400 रुपये में मिल रही थी, अब इसका भाव कम होकर 380 रुपये हो गया है। इसी तरह बिड़ला सम्राट (Birla Samrat) का भाव 440 रुपये से कम होकर 420 रुपये बोरी और एसीसी का भाव 450 रुपये से घटकर 440 रुपये बोरी हो गया है। कारोबारियों ने कहा कि सीमेंट की कीमतें अभी भी सामान्य से ज्यादा ही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में सीमेंट व सरिया जैसे बिल्डिंग मटीरियल के दाम में और गिरावट देखने को मिल सकती है। खासकर सीमेंट के दाम पर डीजल-पेट्रोल के सस्ते होने का असर पड़ेगा।

दरअसल अभी कई फैक्टर घर बनाने का सपना पूरा करने में सहयोग कर रहे हैं। पहले तो सरकार ने आसमान छूती महंगाई को कम करने के लिए डीजल और पेट्रोल पर टैक्स घटा दिया। इसके बाद घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें नियंत्रित करने के लिए इसके निर्यात पर टैक्स बढ़ा दिया गया। सरकार के प्रयासों के अलावा भी कुछ फैक्टर अनुकूल हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही निर्माण कार्यों में कमी आने लगती है, जिससे बिल्डिंग मटीरियल्स की डिमांड खुद ही कम होने लगती है। मार्केट में जैसे ही डिमांड गायब होती है, इन मटीरियल्स के दाम धड़ाम हो जाते हैं।