यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक बार फिर से ब्राम्हण कार्ड खेला है। इस बार पार्टी ने इसे ब्राह्मण सम्मेलन की बजाए प्रबुद्ध वर्ग संवाद सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी का नाम दिया है। यानी सियासत वही है, लेकिन अंदाज नया है।

यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए के लिए प्रबुद्ध वर्ग संवाद सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी के नाम से बसपा 23 जुलाई से अयोध्या से अपना अभियान शुरू किया। इसके तहत आज बसपा महासचिव और राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। सतीश चंद्र मिश्र ने सुबह हनुमान गढ़ी पहुंचकर बजरंगबली के दर्शन किए। इसके बाद रामजन्म भूमि जाकर प्रभु श्री रामलला का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह सरयू नदी के तट पर पहुंचकर सौ लीटर दूध से बकायदा मंत्रोच्चार के बीच दुग्धाभिषेक किया। 

वह सरयू आरती में भी शामिल होंगे। सतीश मिश्रा का अयोध्या के साधु संन्यासियों से मिलकर आशीर्वाद लेने का भी कार्यक्रम है। वह लगभग 12 बजे तारा रेसार्ट पहुंचकर प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी में शामिल होंगें और वर्तमान परिवेश में इस वर्ग के सम्मान, सुरक्षा व तरक्की कैसे हो, इस पर चर्चा करेंगे। अयोध्या के बाद 24 व 25 जुलाई को अंबेडकरनगर, 26 को प्रयागराज, 27 को कौशांबी, 28 को प्रतापगढ़ और 29 को सुल्तानपुर में सम्मेलन होगा। ज्ञात हो कि बसपा को उम्मीद है कि वर्तमान परिस्थितियों में ब्राह्मण समाज को साथ लाकर यूपी में में 2007 का इतिहास दुहराया जा सकता है लेकिन पार्टी की तरफ से इस बार एक बड़ा बदलाव किया गया है। इस बार पार्टी ने इसे ब्राह्मण सम्मेलन की बजाए प्रबुद्ध वर्ग संवाद सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी का नाम दिया है। यानी सियासत वही है लेकिन अंदाज नया है। गौरतलब है कि बसपा ने 2007 में ब्राह्मण समाज को साथ लेकर सूबे की सियासत में पहली बार सोशल इंजीनियरिंग जैसी शब्दवली प्रचलित की थी जिसके परिणाम से यूपी में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी।