सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सद्भावना के तौर पर दो बांग्लादेशी नागरिकों को अपने समकक्ष बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) को सौंप दिया है। दक्षिण बंगाल फंटियर्स के बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करने वाले दो बांग्लादेशी नागरिकों को राणाघाट और हकीमपुर में दो अलग-अलग सीमा चौकियों पर सैनिकों ने पकड़ लिया। दो में से एक बांग्लादेशी महिला थी, जिसे भारत में बेहतर आजीविका के लिए दलालों द्वारा लालच दिया गया था।

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बीएसएफ ने 29 अप्रैल को भी बीओपी जीतपुर में दो बांग्लादेशी महिलाओं को पकड़ा था, जिन्होंने बिना वैध दस्तावेजों के भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था और उन्हें सद्भावना के तौर पर बीजीबी को सौंप दिया था। बीएसएफ अब बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों को बीजीबी को सौंप देती है, जब तक कि पकड़े गए व्यक्तियों का भारत में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। ये बांग्लादेशी नागरिक बेहतर आजीविका की तलाश में अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हैं।

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एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी, 2019 से 28,2022 अप्रैल के बीच कम से कम 4,896 बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में पार करने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में प्रवेश करने या छोडऩे वाले अवैध प्रवासियों की अधिकतम संख्या दक्षिण बंगाल फं्रटियर्स से है। अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि भारत में प्रवेश करने या छोडऩे वाले अवैध अप्रवासियों की अधिकतम संख्या बंगाल के दक्षिणी हिस्से में होती है क्योंकि कुछ हिस्सों और नदी की सीमाओं पर बाड़ नहीं लगा हुआ होता है। अधिकारियों ने कहा, भारत बांग्लादेश के साथ 4,096 किमी लंबी सीमा साझा करता है, जिसमें से दक्षिण बंगाल फंटियर्स लगभग 913.32 किमी साझा करता है। बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर्स के तहत, लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र या तो बिना बाड़ वाला या रिवरिन बेल्ट है और कुछ हिस्सों में, गांव दोनों तरफ अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बहुत करीब स्थित हैं और इससे अवैध अप्रवासियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।