त्रिपुरा में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बॉर्डर गार्ड ऑफ बांग्लादेश (बीजीबी) के बीच गुरुवार देर रात चली बैठक के बाद बीएसएफ ने रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के 5 जवानों सहित 7 बांग्लादेशी नागरिकों को बीजीबी जवानों को सौंप दिया। ग्रामीणों ने इन लोगों को भारतीय क्षेत्र से पकड़ा था और बीएसएफ को सौंप दिया था। पुलिस ने हालांकि कहा कि इन घुसपैठियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया क्योंकि बीएसएफ ने अपने स्तर पर मामले को संभाला और इनकी पहचान करके पिछली रात वापस भेज दिया।


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों का समूह गांववालों का अपहरण करना चाहता था लेकिन उनके हमले के कारण समूह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके। इसके बाद गांववालों ने आरएबी के 5 जवान और 2 अन्य महिला मुखबिरों को देखा था। उल्लेखनीय है कि तार के बेड़े के पार भारी संख्या में भारतीय रहते हैं और आरएबी के जवान अंतरराष्ट्रीय सीमा के 150 यार्ड के अंदर तक आ गए थे जहां उन्हें गांववालों ने दबोच लिया।


आरएबी जवानों ने हालांकि घुसपैठ की खबरों को खारिज करते हुए दावा किया कि खुफिया सूचना के आधार पर आरएबी-11 सीपीसी-2 के जवानों ने सीमा के पास गांव से अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ के तस्कर को पकड़ने गए थे जिनमें से 1 तस्कर भागकर भारतीय क्षेत्र के गांव में चल गया और उसके पीछे 3 आरएबी जवान और 2 महिला मुखबिर ने भी अनजाने में सीमा लांघ दी।


बीएसएफ ने आरएबी कमांडर मुहीतुल इस्लाम के हवाले से कहा, 'आरएबी की बांग्लादेश से भागकर आए आरोपी को पकड़वाने में मदद करने के बजाए रहीमपुर के गांववालों ने 2 महिला मुखबिर सहित आरएबी जवानों को पकड़ लिया और बिना उनकी पहचान किए चोट पहुंचायी। आरएबी जवानों के पास हथियार थे लेकिन उन्होंने इसका इस्तेमाल नहीं किया और किसी तरह बीएसएफ की नजदीकी चौकी पर पहुंचे।' उन्होंने बीएसएफ से गांववालों के ऊपर कड़ी नजर रखने का आग्रह किया क्योंकि बंगलादेश से भागकर आए मादक पदार्थ के तस्कर यहां पनाह लेते हैं।


गांववालों ने भी हालांकि आरएबी के आरोपों का खंडन किया और कहा कि 2 महिला सहित 5 आरएबी जवान रहीमपुर में गेट 168 से घुसपैठ कर रहे थे और उन्होंने तस्कर होने के शक में एक भारतीय का अपहरण करने की भी कोशिश की जिसके बाद गांववालों ने घुसपैठियों का पीछा किया।


गांववालों ने 3 आरएबी जवानों को पकड़ लिया जिसमें से 2 की पहचान वाबाइदुल और जसीम के रूप में हुई और इन दोनों के पास हथियार थे। गांववालों ने इन लोगों पर शोषण करने के आरोपों को खारिज किया और कहा कि इन घुसपैठियों की पहचान होने के बाद इन्हें सम्मानजनक तरीके से बीएसएफ को सौंप दिया गया।