पशु तस्करों के हमले में शहीद हुए बीएसएफ कमांडेंट दीपक कुमार मंडल का शव शनिवार को उनके आवास पर लाया गया। त्रिपुरा में गौ तस्करों को रोकने के दौरान मंडल घायल हो गए थे।

उन्हें गंभीर हालत में कोलकाता लाया गया था। मंडल को कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने शुक्रवार को उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार को तारकनगर में उनके आवास पर शव को लाया गया।

दीपक कुमार मंडल को श्रद्धांजलि देने के लिए काफी संख्या में लोगों की भीड़ उनके आवास पर जमा हुई। दीपक कुमार मंडल का शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले उनकी बहनों ने अंतिम बार भाई फोंटा के उपलक्ष्य में उनके माथे पर चंदन का लेप लगाया।

इस दिन पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों में भाई फोंटा या भाई दूज मनाई गई। इस दिन बहन अपने भाईयों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती है। आंसुओं के बीच मंडल की दोनों बहनों ने चंदन के लेप को भाई के ठंडे पड़ चुके माथे पर लगाया।

बीएसएफ की 145 वीं बटालियन के कमांडेंट दीपक कुमार 16 अक्टूबर को त्रिपुरा में बांग्लादेश बॉर्डर पर उस वक्त घायल हो गए थे जब बीएसएफ ने पशुओं की तस्करी करने वाले एक गिरोह को रोकने की कोशिश की थी। मंडल मूलत: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के रहने वाले थे।

उन्हें फोर्स में प्रभावी अधिकारी के रूप में पहचाना जाता था। कमांडेंट दीपक कुमार मंडल त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से 60 किलोमीटर दूर बेलारडप्पा बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात थे। 16 अक्टूबर की रात 1.20 बजे उन्होंने कुछ संदिग्ध गाडिय़ों की आवाजाही देखी।

कमांडेंट दीपक कुमार मंडल ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे भागने लगे। कमांडेंट दीपक कुमार मंडल ने उनका पीछा किया, हालांकि रात का फायदा उठाते हुए एक तस्कर ने उन्हें अपनी गाड़ी से कुचल दिया। इसके बाद त्रिपुरा पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि पुलिस दो अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

आपको बता दें कि त्रिपुरा में बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है। 70 फीसदी हिस्से में कंटीले तारों की फेंसिंग होने के बावजूद वहां तस्करों की गतिविधियां जारी है।

बीएसएफ की ओर से सीमा पर कड़ी चौकसी बरतने की वजह से जमीन के रास्ते बांग्लादेश को गाय-बैल और बछड़ों की तस्करी होना लगभग बंद हो गया है लेकिन पशु तस्कर फिर भी बाज नहीं आ रहे हैं।