त्रिपुरा में मिजोरम के ब्रू-शरणार्थी समस्या के अंतिम समाधान के लिए 16 जनवरी को नई दिल्ली में चार पक्षीय समझौत किया जाएगा। 22 वर्षों से चल रही इस समस्या के लिए आइज़ोल में होने वाले समझौते की जानकारी मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने अपनी सत्तारूढ़ पार्टी - मिज़ो नेशनल फ्रंट के एक कार्यक्रम में दी है।

प्रस्तावित समझौता के होने से त्रिपुरा और मिज़ोरम के बीच दो दशक पुरानी ब्रू-शरणार्थी समस्या का समाधान होने के आसार है। यह समझौता 16 जनवरी को त्रिपुरा में 7 राहत शिविरों में 35 हजार से अधिक ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही स्थायी तौर पर बसाने के लिए किया जाएगा। इस चार-पक्षीय समझौते पर त्रिपुरा सरकार, मिज़ोरम सरकार, केंद्रीय गृहमंत्रालय और मिज़ोरम ब्रू विस्थापित जन फोरम-एमबीडीएफ़ हस्ताक्षर करेगी।

पिछले अक्टूबर को त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे 35 हजार ब्रू-शरणार्थियों को वापिस मिज़ोरम में भेजने की प्रक्रिया का 9वां और आखरी चरण शुरू किया था। लेकिन मुश्किल से 800 ब्रू शरणार्थी ही वापिस मिज़ोरम आए। एक महीने से भी अधिक ब्रू-शरणार्थियों ने प्रत्यावासन प्रक्रिया का विरोध किया और आखिर में दिसम्बर में त्रिपुरा सरकार और ब्रू-शरणार्थी मंच के बीच बातचीत के बाद ब्रू-शरणार्थियों ने विरोध वापिस लिया था।

त्रिपुरा सरकार ब्रू-शरणार्थियों को मिज़ोरम में वापिस न भेजने और राज्य में ही स्थायी तौर पर बसाने को लेकर सहमत हुयी थी। त्रिपुरा सरकार के इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृहमंत्रालय और ब्रू-शरणार्थियों का मंच - एमबीडीएफ़ ने भी सहमति दी थी। मिज़ोरम सरकार और मिज़ो जन संगठनों ने त्रिपुरा सरकार के इस प्रस्ताव पर खुशी जताई है। त्रिपुरा सरकार के इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने एक महीने में स्वीकृति देते हुए केंद्रीय गृहमंत्रालय की ओर से सभी पक्षों को नई दिल्ली में 16 जनवरी को ब्रू-शरणार्थी समस्या का स्थायी समाधान के समझौता पर हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया हैं ।

त्रिपुरा कांग्रेस ने राज्य में ब्रू-शरणार्थियों को स्थायी तौर पर बसाने का विरोध किया हैं और उन्हें वापिस मिज़ोरम में भेजने की मांग की हैं। वही कांग्रेस छोड़ चुके और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने राज्य कांग्रेस की इस मांग का विरोध किया हैं। लगभग 35 हजार मिज़ोरम के ब्रू-शरणार्थी त्रिपुरा के उत्तरी त्रिपुरा जिले के दो उपखंड - पानीसागर और कंचनपुर में स्थित 7 - राहत शिविरों में 1997 से रह रहे हैं।

मिज़ोरम में 1997 के मध्य में बहुसंख्यक मिज़ो और अल्पसंख्यक ब्रू या रेयांग समुदायों के बीच हिंसा भड़कने और डर के चलते कोई 30 हजार ब्रू लोग राज्य के मामित, कोलासिब और लुंगलई जिलों की 9 विधानसभा क्षेत्रों के कई दर्जनों गांवों से पड़ौसी राज्य त्रिपुरा में पलायन कर गये थे। 2009 से मिज़ोरम सरकार ने त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे ब्रू-विस्थापितों को वापिस मिज़ोरम में लाने के लिए कई प्रयास किये हैं। इसके बावजूद पिछले 10 सालों 5 हजार से भी कम ब्रू-शरणार्थी लोग वापिस मिज़ोरम आये हैं।

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