त्रिपुरा के 7 शरणार्थी शिविरों में रह रहे रेयांग (ब्रू ) की मिजोरम वापसी इसी साल अक्टूबर में शुरू होगी। इस संदर्भ में पिछले दो दिनों तक मामित और कोलासिब जिला के उपायुक्त कार्यालयों में राज्य सरकार और राज्य के मिजो जन संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में सहमति बनी। इस काम के लिए जिला स्तरीय कोर समिति बनाई जाएगी। इन कोर समितियों की निगरानी संबन्धित जिला उपायुक्त करेंगे। समितियां रेयांग के मिज़ोरम में घर वापसी के लिए जरूरी तैयारियां करेगी।

मामित जिला के उपायुक्त और मामित जिला रेयांग प्रत्यावासन कोर समिति के प्रमुख डॉ. ललरोजामा ने बताया, मिजोरम में रेयांग (ब्रू ) का प्रत्यावासन एक बहुत बड़ी समस्या हैं। इसको सफलतापूर्वक लागू करने के लिए बहुत सारी तैयारियों और मेहनत करने की जरूरत पड़ेगी। जैसाकि मामित जिला में सबसे ज्यादा ब्रू लोगों का प्रत्यावासन होने की संभावना हैं। इसलिए सरकारी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए ज्यादा काम और मेहनत करनी पड़ेगी। मामित जिले में कुल 4185 ब्रू-परिवारों का प्रत्यावासन और पुर्नावास होने की उम्मीद हैं। कोलासिब जिला के उपायुक्त जोएसांगा के नेतृत्व में राज्य सरकार और मिज़ो जनसंगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में लगभग 822 ब्रू-परिवारों का कोलासिब जिला के कई गावों और कस्बों में पुर्नावास कराने के लिए सहमति बनी।

कई रिपोर्टों के अनुसार, उत्तरी त्रिपुरा जिला के कंचनपुर और पानीसागर उपखंडों के 7 शरणार्थी शिविरों में 35 हजार के लगभग मिजोरम के रेयांग (ब्रू) लोग रह रहे हैं। 1997 और 2007 में मिज़ोरम में हुयी जनजातीय हिंसा के परिणामस्वरूप लगभग 5 हजार ब्रू भागकर पड़ोसी राज्य त्रिपुरा में शरण ली थी। 2009 से अब तक मिजोरम सरकार ने ब्रू-शरणार्थियों की राज्य में वापसी के कई प्रयास किये, लेकिन 10 साल के प्रयासों के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं आये। जैसा कि ब्रू-शरणार्थियों ने मिजोरम में सुरक्षा जोखिम और कमजोर पुर्नावास प्रबंध और राहत सामाग्री पैकेज के चलते मिजोरम में वापसी करने से इंकार करते रहे हैं। अगर इस बार रेयांग (ब्रू ) लोग मिजोरम में वापसी नहीं करते हैं तो फिर राज्य के निर्वाचन और मतदाता सूची में से उनके नाम हटा दिये जायेंगे।