असम की मूल असमिया जनजाति को बचाने के शोरगुल के बीच अब मिजोरम के ब्रू(रियांग) जनजाति के अधिकारों की अवाज उठ रही है। 'भारत हित रक्षा अभियान' संस्था ने इस बारे में पहल करते हुए ब्रू-जनजाति के विस्थापितों को अधिकार देने की मांग की है। दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में अभियान संस्था ने बताया कि उनके 75 सदस्य 1 से 10 सितंबर के बीच मिजोरम और त्रिपुरा का दौरा करेंगे और ब्रू जनजाति की जमीनी हकीकत पर रिपोर्ट बनाकर केंद्र सरकार को सूचित करेंगे।



ब्रू(रियांग) जनजाति को संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए भारत हितरक्षा अभियान नाम की गैर सरकारी संस्था मुहिम चला रही है। संस्था ने आरोप लगाया कि परंपरागत रूप से वैष्णव हिंदू कहलाने वाले ब्रू-जनजाति के 40,000 लोग विस्थापन की पीड़ा झेल रहे हैं, लेकिन कोई भी उन्हें न्याय दिलाने की पहल नहीं कर रहा है। संस्था के मुताबिक त्रिपुरा-मिजोरम की सीमा के आसपास 40,000 लोगों ने शरण लिया हुआ है, क्योंकि 22 साल पहले उन्हें अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।