असम से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। असम में तैनात एक आईपीएस अधिकारी का भाई कश्मीर में कथित रूप से आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। इसका नाम है शम्स उल हक मेंगनू जो पेशे से यूनानी डॉक्टर है। वह आईपीएस अधिकारी इनाम उल हक मेंग्नू का भाई है। बताया जा रहा है कि शम्स उल हक शोपियां से गायब है। कहा जा रहा है कि वह आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। इनाम जो फिलहाल हामरेन में तैनात है। हमारेन पश्चिम कार्बी आंग्लोंग जिले का हेडक्वार्टर है।

इनाम दक्षिण कश्मीर के शोपियां से ऑर्थोपेडिक है। उन्होंने 2012 के सिविल सर्विस एग्जामिनेशन में 208 वीं पॉजिशन हासिल की थी। शम्स शोपियां जिले के द्रागुद गांव का रहने वाला है। वह श्रीनगर कॉलेज से यूनानी मेडिसिन और सर्जरी का कोर्स कर रहा था और 6 मई से लापता है। असम पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हमनें भी इस घटना के बारे में सुना है। हम पश्चिम कार्बी आंग्लोंग पुलिस से बात करेंगे और जम्मू कश्मीर से भी इस बारे में जानकारी लेंगे।


आपको बता दें कि आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक मई माह में कश्मीर से कम से कम 20 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। करीब 81 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। इन संगठनों में आईएसआईएस कश्मीर और अंसार घाजवत उल हिंद जैसे संगठन भी शामिल है जो इस साल मई तक अल कायदा के समर्थन का दावा करते हैं। अधिकारियों के मुताबिक साल 2018 युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिहाज से सबसे बुरा साल रह सकता है।

2017 में 126 युवाओं ने हाथ में बंदूक थाम ली थी। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक अति संवेदनशील शोपियां और पुलवामा जिले के और युवा आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। दोनों जिले दक्षिण कश्मीर में पड़ते हैं। घुसपैठ की घटनाएं भी बढ़ी है। कई आतंकी जम्मू के पुंछ और राजौरी जिलों और एलओसी से कश्मीर घाटी में घुस चुके हैं।



2010-2013 की तुलना में 2014 के बाद कश्मीर में आतंकी संगठनों में युवाआें के शामिल होने की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2014 में आतंकी संगठनों में शामिल होने वाले युवाआें की संख्या 53 थी। 2015 में ये बढ़ कर 66 हो गर्इ। तो वहीं 2016 में 88 हो गर्इ। इससे पहले कश्मीर विश्वविद्यालय से एमबीए कर चुके 26 वर्षीय जुनाद अशरफ सेहराई भी इस साल आतंकी संगठन में शामिल हो गए। जिन्होंने सैयद अली शाह गिलानी के बाद  तहरिक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष का पद संभाला।
 तहरीक-ए-हुर्रियत एक अलगाववादी संगठन है। जम्मू कश्मीर के सीआर्इडी के द्वारा तैयार की गर्इ एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां सुरक्षा कर्मियासें के द्वारा चलाएं जा रहे सफल आतंकवाद विरोधी अभियान के बावजूद पिछले तीन सालों में आतंकवादियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुर्इ है। तो वहीं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याालय से पीएचडी कर रहे कुपवाड़ा के 26 वर्षीय मन्नन बशीर वानी भी इसी साल आतंकी संगठन में शामिल हुए।