कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमीक्रोन अब बेहद गंभीर बनता जा रहा है। हालांकि, भारत में इसके मामले 143 ही हैं लेकिन आंकड़ों से ज्यादा इसके बढ़ने की रफ्तार पर ध्यान देना जरूरी है। भारत ओमीक्रोन के शुरुआती चरण में है और इसके सामने ब्रिटेन जैसे देशों का उदाहरण मौजूद है।

दुनिया में सबसे पहले वैक्सिनेशन शुरू करने वाला और करीब-करीब अपने सभी प्रतिबंध वापस लेने वाला ब्रिटेन एक बार फिर घुटनों पर आता दिख रहा है। ब्रिटेन के हालात उन भयावह तस्वीरों की याद दिला रहे हैं जो पहली लहर के दौरान इटली से आ रही थीं।

पहली लहर के दौरान इटली में सर्वाधिक संक्रमण के मामले और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की जा रही थीं। हालांकि ब्रिटेन में अभी अस्पताल में भर्ती होने वाले और मौते के मामले कम हैं लेकिन संक्रमण का आंकड़ा तेजी से एक लाख दैनिक मामलों की ओर बढ़ रहा है।

शनिवार को यहां कोरोना वायरस के 90,418 दैनिक मामले दर्ज किए गए। अब तक ब्रिटेन में ओमीक्रोन के करीब 25 हजार मामले सामने आ चुके हैं जबकि अब तक सात लोगों की इससे मौत हो चुकी है। शनिवार को स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि बीते 24 घंटों में ओमीक्रोन के 10 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं।

फोर्ब्स के एक लेख में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ब्रूस वाई ली ने कहा कि हमें 'ओमीक्रोन' को 'ओमीकोल्ड' नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह सिर्फ साधारण कोल्ड जैसा बिल्कुल नहीं है। ओमीक्रोन लोगों को बीमार कर सकता है, उन्हें अस्पताल पहुंचा सकता है और जैसा देखा जा चुका है कि यह लोगों की जान भी ले सकता है। 16 दिसंबर तक ब्रिटेन में ओमीक्रोन के चलते 85 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। विशेषज्ञों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को क्रिसमस और नए साल पर लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध लागू करने की सलाह दी है जिसे वह लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

ब्रिटेन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रोफेसर क्रिस व्हिट्टी और मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वालेंस ने शनिवार को कैबिनेट सदस्यों को चेतावनी दी कि देश में प्रति दिन 3,000 से अधिक अस्पताल में भर्ती होने से रोकने के लिए सख्त उपायों की जरूरत है। लॉकडाउन जैसे फैसले लेना सरकारों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कदम है लेकिन स्थिति पर काबू पाने के लिए यह एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है और हुआ भी है। लेकिन बोरिस जॉनसन और उनके मंत्रिमंडल ने क्रिसमस से पहले तत्काल प्रतिबंध लगाने की किसी अटकल को खारिज कर दिया है।

नया उपाय ब्रिटेन की न्यू ईयर ईव पर असर डाल सकता है। बोरिस जॉनसन व्यक्तिगत रूप से क्रिसमस से पहले किसी भी प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं। वह तर्क दे रहे हैं कि बूस्टर डोज से स्थिति को काबू किया जा सकता है। ज्यादातर कैबिनेट सदस्यों ने उनका समर्थन किया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि बड़ी संख्या में अगर लोग संक्रमित होंगे या अस्पताल में भर्ती रहेंगे तो इससे टीकाकरण अभियान भी प्रभावित हो सकता है। इस बीच वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है जिसने एक खौफ का माहौल बना दिया है।

कुछ दिनों पहले ब्रिटेन के 'प्रफेसर लॉकडाउन' नील फर्ग्यूसन ने सुझाव दिया था कि अगर उचित प्रतिबंध नहीं लगाए गए तो सर्दियों में ब्रिटेन में ओमीक्रोन से होने वाली मौतों का आंकड़ा 5000 तक जा सकता है। बढ़ते हुए आंकड़ों को लेकर प्रफेसर नील फर्ग्यूसन ने नए साल पर प्रतिबंधों को कड़ा करने का आह्वान किया है। इंपीरियल कॉलेज लंदन में उनकी टीम ने पाया कि सबसे बेहतर स्थिति में भी प्रतबंधों के बिना जनवरी में करीब 3000 दैनिक ओमीक्रोन मौतें हो सकती हैं। इंपीरियल ने पाया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि नया वेरिएंट डेल्टा की तुलना में कम गंभीर है। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि इससे लोगों के दोबारा संक्रमित होने और टीकों के काफी कमजोर होने की संभावना साढ़े पांच गुना अधिक है।

एक प्रमुख अध्ययन के अनुसार झींकना, सिरदर्द और थकान ओमीक्रोन के प्रमुख लक्षण प्रतीत होते हैं जो यह दिखाता है कि यह कोविड की तुलना में 'कोल्ड' जैसा प्रतीत होता है। लेकिन स्पष्ट है कि कुछ परिस्थितियों में यह कोल्ड की तुलना में ज्यादा घातक साबित हो सकता है। लंदन में मामलों के विश्लेषण के आधार पर 3 से 10 दिसंबर के बीच वायरस के सबसे आम लक्षण बहती नाक, सिरदर्द, थकान, छींकना और गले में खराश थे।

दिल्ली में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल ने आगाह करते हुए बताया कि अगर यूके की तरह भारत में भी ओमीक्रोन के विस्तार के मामले बढ़ते हैं तो यहां हर दिन 14 लाख संक्रमण के केस सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप के देश गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। यह इसके बावजूद हो रहा है कि वहां पर 80 फीसदी कम से कम आंशिक वैक्सिनेशन हो चुका है। ब्रिटेन से सबक लेते हुए भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। भले ही ओमीक्रोन भारत में दस्तक दे चुका है लेकिन अभी हालात बेकाबू नहीं हुए हैं। साधारण सावधानियों का पालन करके ही ओमीक्रोन को फैलने से रोका जा सकता है।