डोकलाम विवाद के बाद से भारत अपनी सीमा को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरतना चाहता और यही कारण है कि भारत-चीन बॉर्डर पर 50 नई सीमा चौकियां बनाने जा रहा है।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए आगे बताया कि अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तेज रफ्तार से 25 सड़कें बनाई जा रही हैं जो चौकियों को बॉर्डर से जोड़ेंगी।


इतना ही नहीं बॉर्डर पर तैनात इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों और अफसरों के लिए चीनी भाषा मेंडेरियन की बेसिक जानकारी रखना भी जरूरी होगा, ताकि डोकलाम विवाद जैसी स्थिति अगर फिर से बने तो चीनी सेना पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) की भाषा समझने में दिक्कत ना आए और सेना उन्हें उनकी ही भाषा में मुंह तोड़ जवाब दे सके।

गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी को संचार और निगरानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली G-SAT सेटलाइट की नोडल फोर्स बनाया है। इसके जरिए बीएसएफ (पाकिस्तान-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात), एसएसबी (इंडो-नेपाल बॉर्डर पर तैनात) और आईटीबीपी जो चीन बॉर्डर पर तैनात है उनको संचार की अच्छी सुविधाएं मिलेंगी जो बॉर्डर पर रीयल टाइम मॉनेटरिंग में मदद करेगा इससे ना सिर्फ बॉर्डर पर घटित हर छोटी से छोटी घटना पर नजर रखी जाएगी बल्कि सेना के जवानों को सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।