असम में अलग बोडोलैंड राज्य की मांग जोर पकड़ती जा रही है। ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन(एबीएसयू), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड प्रोग्रेसिव(एनडीएफबीपी) और पीपुल्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी फॉर बोडोलैंड मूवमेंट(पीजेएसीबीएम) ने असम के कई जिलों में सोमवार को तीन घंटे का विरोध प्रदर्शन किया। अलग बोडोलैंड राज्य गठित करने की मांग को लेकर इन संगठनों ने ब्लड सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया है।

संबंधित संगठन अपनी मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजेंगे जिस पर अलग बोडोलैंड राज्य के समर्थकों के खून से हस्ताक्षर होंगे। पत्र में बोडो संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 व 3 के तहत अलग राज्य के उनके दावे पर विचार करने का अनुरोध किया है। साथ ही प्रस्तावित बोडोलैंड के लिए असम में रह रहे बोडो लोगों के राजनीतिक अधिकार सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

एबीएसयू के अध्यक्ष प्रमोद बोडो ने बताया कि विरोध प्रदर्शन में हजारों महिलाओं और बच्चों ने हिस्सा लिया। इन लोगों ने हाथों में  बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वी वांट बोडोलैंड, नो बोडोलैंड नो रेस्ट के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि असम के दो हिस्सों में बांटा जाए। प्रमोद बोडो ने कहा कि प्रदर्शन कोकराझार से लेकर जोनई तक पूरे असम में हुआ।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान अलग बोडोलैंड राज्य की मांग पर विचार का आश्वासन दिया था। पिछले साल असम में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने भी अलग बोडोलैंड राज्य की मांग का समर्थन किया था। भाजपा को सत्ता में आए एक साल से ज्यादा हो चुकी है लेकिन अलग बोडोलैंड राज्य की मांग पूरी नहीं हो पाई है। बीटीसी चीफ एच.मोहिलारी ने भाजपा को गठबंधन पर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा है।

मोहिलारी ने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो बोडो पीपुल फ्रंट कांग्रेस में शामिल हो जाएगी। आपको बता दें कि बीपीएफ असम में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा है। भाजपा ने दावा किया था कि वह न केवल पंचायत चुनावों में बल्कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। इससे नाराज बीटीसी चीफ ने भाजपा को धमकी दी है कि अगर भाजपा ने गठबंधन पर अपना रूख स्पष्ट नहीं किया तो बीपीएफ कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए मजबूर हो जाएगी। मोहिलारी ने दावा किया कि अगर बीपीएफ ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया तो असम में भाजपा जीत नहीं पाएगी और राज्य में अगली सरकार उनके गठबंधन की बनेगी। हालांकि राज्य भाजपा के अध्यक्ष रंजीत दास ने कहा कि अकेले चुनाव लडऩे का फैसला केन्द्र ने लिया है न कि स्टेट ने।