कोरोना वैक्सीन पर हो रही चर्चा के बीच नया संभावित खतरा सामने आया है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल ही में की गई एक शोध में सामने आया है कि अन्य वैक्सीन की तुलना में कोरोना वैक्सीन से ब्लड क्लॉटिंग का खतरा ज्यादा रहता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्वतंत्र रिसर्च टीम ने यह शोध किया है।

दरअसल, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से रेयर क्लॉटिंग की खबरें सबसे पहली बार जर्मनी से आई थीं। सेलेबल वेनस साइनस थ्रोबोसिस (सीवीएसटी) नाम की इस रेयर ब्लड क्लॉटिंग को जर्मनी के चिकित्सा नियामक संगठन ‘पॉल एर्लिच इंस्टीट्यूट’ ने पकड़ा था। मार्च में संस्थान ने बताया था कि ब्लड क्लॉटिंग के मामले युवाओं व महिलाओं में ज्यादा सामने आए थे।

हालांकि जांच के बाद ब्रिटेन के औषधि नियामक ने कहा था किसी खतरे की तुलना में टीके के फायदे अधिक हैं। औषधि एवं स्वास्थ्य देखभाल नियामक एजेंसी ने कहा था कि इस तरह से खून के थक्के जमने से संबंधित खतरा ‘बहुत कम है’ और लोगों को यह टीका लगवाना जारी रखना चाहिए। जानकारी के मुताबिक शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण से सीवीएसटी का खतरा 8-10 गुना ज्यादा है। करीब 5 लाख लोगों पर की गई स्टडी में पाया गया कि कोविड-19 संक्रमण से प्रति दस लाख लोगों में 39 को सीवीएसटी का खतरा है। जबकि ब्रिटेन के औषधि नियामक का कहना था कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से ये खतरा दस लाख लागों में सिर्फ 5 को है। वहीं, रिसर्चर्स के मुताबिक सीवीएसटी होने के बाद मौत खतरा करीब 20 प्रतिशत है।

वहीं, अमरीकी फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन से ब्लड क्लॉटिंग की खबरें सामने आई हैं। इसके बाद इसके जरिए वैक्सीनेशन पर तात्कालिक रोक लगा दी गई है। अमरीका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने कहा है कि वो इसे लेकर जांच करवा रहा है।