मुंबई। भारत में बैठे दलाल पाकिस्तानी और रूसी सॉफ्टवेयरों की मदद से रेल टिकटों की कालाबाजारी कर रहे हैं। ये विदेशी सॉफ्टवेयर को किराये पर चलाते हैं, इसके एवज में डेवलपर्स को सालाना लाखों का भुगतान क्रिप्टोकरंसी में करते हैं। विदेशी सॉफ्टवेयर इतने ताकतवर होते हैं कि आईआरसीटीसी वेबसाइट की सिक्योरिटी को चंद सेकेंड में तोड़कर कन्फर्म टिकट बुक कर लेते हैं। वहीं, रेलवे की टिकट बुकिंग साइट पर विजिट करने वाले आम आदमी को वेटिंग टिकट से संतोष करना पड़ता है। रेलवे सुरक्षा बल ने अभियान चलाकर 8 मई, 2022 को राजकोट के मन्नान बाघेला को टिकट की कालाबाजारी करने के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद कन्हैया गिरी को 17 जुलाई, 2022 को मुंबई से गिरफ्तार किया। इन दोनों के पास से कोविड एक्स, एएनएमएस बैंक, ब्लैक टाइगर नामक अवैध सॉफ्टवेयर बरामद किए गए थे। आरपीएफ ने देश भर के अलग अलग शहरों से पाकिस्तानी और रूसी सॉफटवेयरों की मदद से रेल टिकट की कालाबाजारी करने वाले 6 दलालों को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक आरपीएफ ने 2019 से लेकर जुलाई 2022 तक 375 अवैध सॉफ्टवेयर बंद कराए हैं, लेकिन कन्फर्म टिकटों की भारी मांग के चलते मार्केट में फिर नए सॉफ्टवेयर आ जाते हैं।

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रेलवे के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी और रूसी सॉफ्टवेयर के जरिए आईआरसीटीसी के 24 यूजर्स की आईडी को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार एक बार में 144 सीटों की बुकिंग की जा सकती है। आम यात्री जब तक रिजर्वेशन फॉर्म भरता है और बैंक से भुगतान की प्रक्रिया पूरी करता है तब तक इन ताकतवर विदेशी सॉफ्टवेयरों की मदद से दलाल आईआरसीटीसी वेबसाइट पर ट्रेन में खाली दिखा रहीं सीटें बुक कर लेते हैं। इन सॉफ्टवेयरों से आईआरसीटीसी वेबसाइट में लॉगइन करने के लिए कैप्चा डालने की जरूरत नहीं होती। डायरेक्ट लॉगइन हो जाता है। इसके बाद पहले से भरे रिजर्वेशन फॉर्म में यात्रियों के नाम, पता, ट्रेन नंबर, तारीख, मोबाइल नंबर आदि जानकारी को जमा कर देता है। बैंक से भुगतान करने पर ओटीपी मोबाइल पर आता है, लेकिन विदेशी सॉफ्टवेयर इस ओटीपी को डायरेक्ट रीड कर लेते हैं। इससे दलाल टिकट बुकिंग की प्रक्रिया तेजी से पूरी कर लेते हैं।

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सूत्रों की मानें तो 24 यूजर आईडी वाले पाकिस्तानी और रूसी सॉफ्टवेयरों का प्रतिमाह किराया 10 हजार रुपये होता है। हर माह सॉफ्टवेयर किराए का पैसा क्रिप्टोकरंसी के माध्यम से भेजा जाता है। सालाना सॉफ्टवेयर लेने पर डेवलपर्स छूट भी देते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पाकिस्तानी और रूसी साॅफ्टवेयर डेवलवपर्स आईआरसीटीसी वेसाइइट से जुड़े शॉर्टकट्स दलालों को सिखाए जाते हैं। इस बारे में रेल मंत्रालय का कहना है कि आईआरसीटीसी (IRCTC), आरपीएफ (Railway Protection Force) और क्रिस (Centre for Railway Information Systems) संयुक्त रूप से अवैध सॉफ्टवेयर से टिकटों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। बीते सात साल में 37 लाख से अधिक संदिग्ध निजी यूजर आईडी को बंद किया गया है। प्रतिदिन होने वाली टिकट बुकिंग की निगरानी भी की जाती है।