पंजाब में अब तक म्यूकोरमाईकोसिस (ब्लैक फंगस) के मामलों की संख्या 188 तक पहुंचने पर सरकार ने बीमारी के इलाज के लिए ऐमफोटेरीसिन दवा की कमी को देखते हुए राज्य में वैकल्पिक दवाओं के स्टाक की मात्रा बढ़ाये जाने के निर्देश दिये हैं। ऐसा करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य के पास सिर्फ लीपोसोमल ऐमफोटेरीसिन बी के टीके स्टाक में रह जाने और आज इसके केवल 880 और टीके मिलने पर मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक दवाओं का स्टाक मजबूत करने पर जोर दिया । 

उन्होंने कहा कि ऐमफोटेरीसिन को भरपूर मात्रा में हासिल करने के प्रयासों के अलावा राज्य सरकार के विशेषज्ञ समूह की सलाह के अनुसार पहले ही वैकल्पिक दवाओं जैसे कि इट्राकोनाजोल (4000 गोलियां) और पोसाकोनाजोल (500 गोलियां) उपलब्ध करवा दी हैं। विशेषज्ञ ग्रुप ने अस्पतालों को इलाज सम्बन्धी प्रोटोकॉल के बारे में सलाह देने और अस्पतालों को मुहैया करवाई जा रही विभिन्न दवाओं के इस्तेमाल के बारे भी अवगत करवाने का कार्य आरंभ दिया है। 

स्वास्थ्य सचिव हुसन लाल ने बताया कि 188 में से 40 मामले कोविड से जुड़े हुये नहीं हैं जबकि 148 व्यक्ति कोविड पीड़ित हैं और 133 व्यक्तियों को स्टीरायड थैरेपी दी जा रही है। इसके अलावा 122 व्यक्ति म्यूकोमाईकोसिस की शुरूआत से पहले आक्सीजन पर थे। कुल 154 व्यक्तियों को डायबिटीज थी जबकि 56 व्यक्तियों की रोगों के साथ लड़ने का सामर्थ्य कम था और 47 व्यक्ति सह-बीमारियां वाले थे। मौजूदा समय के दौरान 156 व्यक्ति उपचार अधीन हैं, जबकि 9 व्यक्ति ठीक हो चुके हैं और 23 की मौत हो चुकी है। 

डा. के. के. तलवाड़ ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। प्रोटोकॉल निर्धारित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के माहिरों के साथ दो सैशन हो चुके हैं और मरीजों पर निगरानी रखी जा रही है। इसके इलावा उनको मदद भी मुहैया करवाई जा रही है। राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब तक ब्लैक फंगस के मामलों की पुष्टि करते हुये मैडीकल शिक्षा सचिव डी. के. तिवारी ने बताया कि सबसे अधिक 16 मामले जी.एम.सी, पटियाला में सामने आए हैं जबकि जी.एम.सी, अमतृसर में 10, फरीदकोट में 8 और मोहाली में 2 मामले सामने आए हैं।