लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के कार्यकर्ताओं के बीच जारी हिंसा फिलहाल खत्म होने का नाम नहीं ले रही। अगरतला के फटिकचर्रा इलाके में बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या का मामला सामने आने से विवाद बढ़ने की आशंका है। राज्य में अभी तक की हिंसा में 100 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। 

नतीजे आने के बाद से ही ऐसी खबरें आने लगी थीं कि बीजेपी कार्यकर्ता सीपीएम और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं। आरोप है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं पर जवाबी हमले में साधन देबनाथ, उत्तम देबनाथ और राजकुमार देबनाथ ने मीठू भौमिक की कथित तौर पर धारदार हथियार से हमला करके हत्या कर दी। भौमिक के साथ मौजूद संजीब लास्कर भी बुरी तरह घायल हो गए और उन्हें अगरतला के सरकारी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि तीनों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के जवाब में हमला किया था। यह अभी साफ नहीं हो सका है कि तीनों किस पार्टी के कार्यकर्ता हैं। 

इस मामले में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने कड़ी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी से सख्त निर्देश जारी करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया, 'मैंने डीजीपी, सीनियर पुलिस अधिकारियों और टीएसआर कमांडेंट्स से संवेदनशील जगहों को चुनावों के बाद की हिंसा से बचाने के लिए सिक्यॉरिटी ड्रिल्स करने के लिए कहा है।' उन्होंने सबी पार्टियों के नेताओं से हिंसा की घटनाओं में शामिल नहीं होने की अपील की है।

 

उधर, त्रिपुरा कांग्रेस ने मांग की है कि राज्य सरकार चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा दे। उन्हें मांग की है क अगर सरकार नागरिकों की सुरक्षा और उनके संवैधानिक हितों की रक्षा नहीं कर सकती है तो वे न्याय की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उनके करीब 76 कार्यकर्ता पिछले दो दिनों में घायल हो गए हैं और कांग्रेस पार्टी दफ्तरों पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि 10 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है।