नागालैंड में भाजपा-एनडीपीपी गठबंधन की सरकार बनने जा रही है। नागालैंड में विधानसभा की 60 सीटें हैं लेकिन चुनाव 59 सीटों पर हुआ क्योंकि उत्तरी अंगामी-2 सीट पर एनडीपीपी के नेता नेफ्यू रियो निर्विरोध चुन लिए गए थे। नागालैंड में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ)से 15 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया और एनडीपीपी से हाथ मिलाया। भाजपा ने 20 जबकि एनडीपीपी ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि एनडीपीपी के खाते में 17 सीटें आई। कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुल पाया। एनपीएफ 27 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, फिर भी वह सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाई है।

आपको बता दें कि भाजपा ने 2003 में एनपीएफ से गठबंधन किया था। इस गठबंधन में जदयू भी शामिल थी। 2003 से कांग्रेस राज्य में सत्ता से बाहर है। भाजपा ने नागालैंड में पहली बार विधानसभा चुनाव 1987 में लड़ा था। तब भाजपा ने 2 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। अगले विधानसभा चुनाव 1989 में हुए लेकिन भाजपा ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। 1993 में भाजपा ने 6 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए लेकिन एक भी नहीं जीता। 1998 में के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने हिस्सा नहीं लिया। 2003 में भाजपा ने 38 उम्मीदवर खड़े किए। इनमें से 7 ने जीत दर्ज की। 2008 में भाजपा ने 23 उम्मीदवार उतारे। इनमें से सिर्फ 2 जीते। 2013 में भाजपा ने 11 उतारे। इनमें से सिर्फ 1 जीता।

आपको बता दें कि नागालैंड ईसाई बहुल राज्य है। यहां ईसाईयों की आबादी 90 फीसदी है। कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 23 उम्मीदवारों को पार्टी का टिकट दिया था लेकिन पांच ने नाम वापस ले लिया। इस कारण कांग्रेस 18 सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई। कांग्रेस ने राज्य में पहली बार 1977 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। उस समय कांग्रेस ने 37 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे लेकिन इनमें से 15 ही जीत पाए थे। नागालैंड में कांग्रेस ने लगातार चार बार पूर्ण बहुमत की सरकारें बनाई है। 1998 के विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस ने रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की थी। उस समय कांग्रेस को 60 में से 53 सीटें मिली थी। 2003 में कांग्रेस को 21 सीटें मिली थी। 2008 में कांग्रेस ने सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। इनमें से 23 ही जीत दर्ज कर पाए। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 8 सीटें मिली थी लेकिन ये सभी विधायक बाद में एनपीएफ में शामिल हो गए।