बीजेपी ने असम में सिटिजनशिप बिल 2019 के खिलाफ हो रहे विरोध के बीच पार्टी के कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर यह विश्वास दिलाने के लिए कहा है कि कानून से असम में किसी तरह का जनसांख्यिक बदलाव नहीं आएगा। साथ ही अतिरिक्त अवैध प्रवासियों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। लोकसभा में पास हो चुके इस विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से अवैध रुप से आकर भारत में बसे गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

सरकार असम के लोगों को यह बताने की कोशिश कर रही है कि 1985, के असम समझौते की धारा 6 लागू होने से स्थानीय मूल निवासियों की रक्षा हो सकेगी। इस धारा में असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान और विरासत को सुरक्षित बनाने के लिए संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा के उपाय किए गए हैं।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, पार्टी के प्रवक्ताओं को विधेयक के विरोध में चल रहे अभियान का जवाब देने के लिए पहले ही कहा जा चुका है। हमने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को समूचे असम में गांव-गांव जाकर लोगों से मिलने और उन्हें यह बताने के लिए कहा है कि समझौते की धारा 6 से कैसे मूल निवासियों की सुरक्षा हो सकेगी।


आरएसएस ने भी अपने स्वयंसेवकों से राज्यभर के लोगों को विधेयक के फायदों के बारे में बताने के लिए कहा है। आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने भी पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, 2017 में समूचे राज्य में लगभग साढ़े चार लाख पर्चे बांटे गए थे। उसमें बताया गया था कि कैसे असम के लोगों को उससे फायदा होगा। हम विधेयक के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार को विफल करने के लिए गांव-गांव जाएंगे।

उन्होंने कहा, हमें पता चला है कि गांवों में विधेयक को लेकर ज्यादा रोष नहीं है, लेकिन हमें अखिल गोगोई की अगुआई वाले किसान संगठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति से जरुर निपटना पड़ेगा। आरएसएस के स्वयंसेवक असम की जनता को बताएंगे कि विधेयक का मूल उद्देश्य छह समुदाय के बेघर को राहत देना है और इससे राज्य में पड़ोसी देश के अवैध प्रवासियों की बाढ़ नहीं आएगी।