1998 में जीत के बाद, 2013 में भाजपा को नहीं मिली एक भी सीट, क्या इस बार भाजपा कर पायेगी जीत दर्ज जी हां आज मेघालय में चुनावी नतीजे आ रहे हैं तो देखना यह कि क्या इस बार बीजेपी इस कांग्रेस को राज्य से उखाड़ फेकेगी या नहीं। मेघालय के विधानसभा चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी(एनपीपी) और कांग्रेस के बीच है। हालांकि भाजपा भी इस बार पूरा जोर लगा रही है। भाजपा अपने दम पर चुनाव लड़ रही है। उसने किसी भी दल के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं किया है। भाजपा ने 47 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं।

आपको बता दें कि मेघालय में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं लेकिन मतदान 59 सीटों पर ही हुआ है। विलियमनगर सीट पर एनसीपी के उम्मीदवार जोनाथॉन संगमा की आईईडी ब्लास्ट में मौत के कारण बाद में चुनाव स्थगित कर दिया गया है। अगर मेघालय के विधानसभा चुनाव के इतिहास को देखें तो स्पष्ट है कि भाजपा यहां बहुत कमजोर है। वह अपने दम पर सरकार बना ही नहीं सकती। यह बात भाजपा को भी पता है इसलिए उसने चुनाव बाद गठबंधन के विकल्प खुले रखे हैं।

मेघालय में भाजपा ने 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला। पार्टी ने 20 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन एक भी चुनाव नहीं जीत पाया। इस चुनाव में कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। एचपीयू को 11, एएचएलसीएएम को 3, एचपीएसडी को 8,पीडीआई को 2 और एमपीपी को 2 सीटें मिली। 10 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।  1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का खाता खुला। उसने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 2 सीटों पर जीत दर्ज की।

1998 में भी कांग्रेस 25 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। यूडीपी को 20, एचपीडीपी, पीडीएम को 3-3, जीएनसी को 1 सीट मिली थी। 5 सीटों पर निर्दलीय जीते थे। 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उसे सिर्फ 2 सीटें मिली। 2003 में भी कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली। 22 सीटें जीतकर वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। एनसीपी को 14, यूडीपी को 9, एमडीपी को 4, केएचएनएएम, एचपीडीपी को 2-2 सीटें मिली। 5 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। 2008 में भाजपा ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन एक ही चुनाव जीत पाया।

2008 में भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। उसे 25 सीटें मिली। एनसीपी को 15, यूडीपी को 11, एचएसपीडीपी को 2, केएचएनएएम और भाजपा को 1-1 सीट मिली। 5 सीटों पर निर्दलीय जीते। 2013 में भाजपा ने 13 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए लेकिन एक भी चुनाव जीत नहीं पाया। 2013 के विधानसभा चुनाव में भी किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली। हालांकि कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। यूडीपी को 8, एचएसपीडीपी को 4, एनसीपी और एनपीपी को 2-2, एनईएसडीपी को 1 सीट मिली। 13 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते।