असम समझौते के क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय समिति गठन की केंद्रीय घोषणा को लेकर नेता विरोधी दल देवब्रत सैकिया ने केंद्र व राज्य सरकार से सात सवाल पूछे हैं। पहले सवाल में सैकिया ने जानना चाहा है कि अभी तक केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार के असम समझौता क्रियान्वयन विभाग ने समझौते के अनुच्छेद-6 को लागू करने के कोई उपाय नहीं किए। फिर अचानक गत दिवस उच्चस्तरीय समिति गठन की घोषणा का क्या औचित्य है।

अब असम समझौते के लिए इतना दर्द क्यों?
दूसरे सवाल में सैकिया ने कहा कि असम विधानसभा में कांग्रेस विधायक अब्दुल खालेक की तरफ अनुच्छेद-6 को लेकर संकल्प-प्रस्ताव क्यों पास नहीं होने दिया था। लोकसभा चुनाव के तीन माह बाकी रहते अचानक असम समझौते के प्रति इतना दर्द क्यों पैदा हो गया है। नेता विरोधी दल के मुताबिक खुद असम विधानसभा असमीज पीपुल की संज्ञा को लेकर एकमत नहीं हो पाई।


केंद्र सरकार ने असमीज पीपुल क्यों लिखा?

नेता विरोधी दल ने आखिर में जानना चाहा है कि भाजपा सरकार सभी पक्षों की सहमति से ही निचली सुबनसिरी जल विद्युत परियोजना शुरू करने के वादे पर कायम है या फिर कहीं उसने इस बीच गुपचुप रूप से यह काम प्रारंभ तो नहीं कर दिया।  फिर गत दिवस जारी विज्ञप्ति में केंद्र सरकार ने असमीज पीपुल क्यों लिखा।

क्या असम को निजी हाथों में देगी केंद्र सरकार?
चौथे सवाल में उन्होंने जानना चाहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले क्या मोदी सरकार असम समझौते के अनुच्छेद-6 के खिलाफ जाने वाले नागरिकता कानून संशोधन विधेयक को वापस लेगी। उन्होंने  यह भी जानना चाहा है कि केंद्र सरकार अनुच्छेद-6 की ही तरह राज्य की छह जनजातीयों को जानजातीय दर्जा दे देगी। सैकिया ने यह भी पूछा है कि अनुच्छेद-6 के क्रियान्वयन एजेंडे के भीतर राज्य के तेल क्षेत्र आदि को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया रोकने की बात भी होगी या नहीं?