पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस द्वारा राज्य में उपचुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इस बीच अब भाजपा ने बंगाल में चुनाव कराने पर सत्ताधारी पार्टी के ‘डबल स्टैंडर्ड’ के लिए उसकी आलोचना की है। इस मुद्दे पर बोलते हुए, राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, वे (तृणमूल) कह रहे हैं कि राज्य में कोई कोरोना नहीं है। अगर ऐसा है, तो वे लोकल ट्रेनों के संचालन की अनुमति क्यों नहीं दे रहे हैं? वे स्कूलों को खोलने को अनुमति क्यों नहीं दे रहे हैं?

उन्होंने कहा, पिछले एक साल से, उन्होंने महामारी के कारण निकाय चुनाव नहीं कराए हैं। सिर्फ ममता बनर्जी की वजह से, तृणमूल अब चुनाव आयोग पर उपचुनाव कराने का दबाव डाल रही है। पिछले एक साल से सभी नगर पालिकाओं और निगमों को प्रशासकों द्वारा चलाया जा रहा है, क्योंकि वहां कोई निर्वाचित निकाय नहीं है। लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं हो सकता। एक ही मुद्दे पर दो अलग-अलग नियम नहीं हो सकते। उन्हें पहले स्पष्ट होना चाहिए।

घोष की प्रतिक्रिया सत्तारूढ़ दल के एक प्रतिनिधिमंडल के गुरुवार को चुनाव आयोग से मिलने और छह महीने से पहले राज्य में लंबित उपचुनाव कराने का आग्रह करने के बाद आई है। तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल में सौगत रॉय, सुखेंदु शेखर रॉय, जौहर सीरकर, सजदा अहमद और महुआ मोइत्रा शामिल थे। तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने ईसी के साथ बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘चुनाव आयोग के साथ हमारी बैठक बहुत सौहार्दपूर्ण रही। चुनाव निकाय ने कहा है कि इसका उद्देश्य चुनाव कराना है और मतदान प्रक्रिया को रोकना नहीं है। हमने चुनाव आयोग को बताया कि स्थिति चुनाव कराने के लिए अनुकूल है, क्योंकि राज्य में कोविड मामलों की संख्या में गिरावट आई है।’’

तृणमूल सांसद ने कहा, हमने उन सभी सात निर्वाचन क्षेत्रों के कोविड आंकड़े भी सौंपे हैं, जहां उपचुनाव लंबित हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह इस मामले पर विचार करेगा। हम चुनाव आयोग से निष्पक्ष प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं। पोल पैनल को सौंपे गए एक ज्ञापन में, तृणमूल ने कहा कि राज्य में कोविड के मामले 70,000 से घटकर 830 हो गए हैं और चुनाव कराने का सही समय है। प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से अक्टूबर में शुरू होने वाले त्योहारी सीजन के दौरान उपचुनाव नहीं कराने का भी अनुरोध किया है। इससे पहले, पोल पैनल ने बंगाल में उपचुनाव कराने पर राजनीतिक दलों की राय मांगी थी। मोइत्रा ने यह सुझाव दिया कि चुनाव आयोग सात निर्वाचन क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से (तीन से चार चरणों में) उपचुनाव करा सकता है। बंगाल में सात विधानसभा सीटें खाली पड़ी हैं, जिनमें कोलकाता का भवानीपुर भी शामिल है, जहां निर्वाचित विधायक सोवन्देब चट्टोपाध्याय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए रास्ता बनाने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। नंदीग्राम से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ विधानसभा चुनाव में हारने वाली बनर्जी के इस सीट से चुनाव लडऩे की संभावना है।