मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी व भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान रहे बाइचुंग भूटिया राजनीति में नए नहीं हैं। उन्होंने 2014 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव और 2016 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि वह दोनों चुनाव हार गए। इसी साल अप्रेल में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ दिया। उन्होंने अपनी पार्टी बनाई है जिसका नाम है हमरो सिक्किम पार्टी(एचएसपी)।


भूटिया की पार्टी ने अगले साल सिक्किम में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के लिए कमर कस ली है। कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के साथ ही सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी कराए जा सकते हैं। ऐसी अटकलें है कि भूटिया की पार्टी चुनाव में भाजपा से हाथ मिला सकती है। एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में भूटिया ने कहा कि हमने हाल ही में गंगटोक में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष से मुलाकात की थी। इस दौरान हमने स्पष्ट कर दिया कि जब तक भाजपा एसडीएफ से अपना गठबंधन नहीं तोड़ती तब तक अन्य क्षेत्रीय दलों,जिनमें हमारी पार्टी भी शामिल है, के भाजपा से हाथ मिलाने की संभावना ना के बराबर है।


बकौल भूटिया,आप हमसे एसडीएफ का साथ देने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? सिक्किम के लोग क्या सोचेंगे, यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। भाजपा हमारे साथ गठबंधन की सोच रही है, हमने बता दिया कि उसे(भाजपा)एसडीएफ को मौजूदा गठबंधन से बाहर करना होगा। ऐसा होने पर ही हम भाजपा के साथ जाने पर विचार कर सकते हैं। भूटिया ने बताया कि उनकी पार्टी की योजना सिक्किम की सभी 32 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने की है। हम वोटर्स के सामने अपनी पार्टी को वैकल्पिक फोर्स के रूप में प्रजेंट करना चाहते हैं।


उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी देश की सभी पार्टियों से अलग है। हमारी पार्टी के संविधान में है कि कोई भी विधायक या पदाधिकारी लगातार दो टर्म के लिए पद पर नहीं रह सकता। अगर पब्लिक की डिमांड के
कारण किसी को दोबारा लाना पड़ा तो वह एक टर्म के ब्रेक के बाद वापस आ सकता है। यह प्रावधान इसलिए लाया गया क्योंकि आमतौर पर यह देखा गया है कि दो टर्म के बाद लोग लालची हो जाते हैं। हम इसे रोकना चाहते हैं। आपको बता दें कि भूटिया ने 2011 में फुटबॉल से संन्यास ले लिया था। 2013 में वे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से जुड़ गए। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए टीएमसी ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में दार्जिलिंग सीट से उतारा था लेकिन वे चुनाव हार गए। 2016 में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भूटिया ने सिलिगुड़ी सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन यहां भी उन्हें हार ही मिली।