2022 के मणिपुर विधानसभा चुनाव (2022 Manipur Assembly Elections) में कांग्रेस की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि भाजपा और उसके सहयोगियों ने उत्तर पूर्व उपचुनावों में जोरदार जीत हासिल की है। बता दें कि उपचुनाव के परिणाम (by election results) मंगलवार को घोषित किए गए। हालांकि कांग्रेस पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन से भाजपा ने सरकार बनाई। कांग्रेस पार्टी तब से राज्य में विधायकों के दलबदल का सामना कर रही है।

राज्य कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास (State Congress in charge Bhakta Charan Das) ने उत्तर पूर्व उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया मांगने के लिए कॉल का जवाब नहीं दिया। भाजपा सरकार पर हमला करते हुए, मणिपुर के लिए पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक जयराम रमेश (JaiRam Ramesh) ने ट्वीट किया, बेंगलुरु स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक, पब्लिक अफेयर्स सेंटर ने शासन के मामले में राज्यों को स्थान दिया है। बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश और छोटे राज्यों में मणिपुर है। यह केंद्र और राज्य में भाजपा के होने का परिणाम है। 

मणिपुर में कांग्रेस के छह विधायकों ने अगस्त में पार्टी छोड़ दी थी, जब कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह (Former Chief Minister Okram Ibobi Singh) के कामकाज की शिकायत करते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाया था। हालांकि, विश्वास मत के दौरान आठ विधायक मतदान से दूर रहे। सत्तारूढ़ गठबंधन में अध्यक्ष सहित 29 विधायक थे, जबकि दलबदल के कारण कांग्रेस की संख्या कम हो गई थी। असम के अलावा, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भाजपा सरकार का नेतृत्व करती है। मंगलवार को उपचुनाव परिणामों की घोषणा के बाद, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी सफलता का श्रेय दिया। 

सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा, पूर्वोत्तर राज्यों के बहुमुखी विकास के लिए प्रधानमंत्री के चौतरफा मिशन के कारण, लोग एनडीए के सहयोगियों को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। सभी राज्यों में हमारी सफलता के साथ, भाजपा और एनडीए की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। भाजपा और उसके सहयोगियों ने पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय और मिजोरम की सभी नौ विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की, जहां 30 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इन राज्यों में कई दशकों तक शासन करने वाली कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली।