कोरोना के कहर के बीच सियासी पारा चढ़ता ही जा रहा है। राजनेता गंगा में मिले कोरोना मरीजों के शवों से सियासी उबार मार रहे हैं। बिहार के बक्सर और उत्तरप्रदेश के गाजीपुर में बहती गंगा में कोरोना के मरीजों के 150 से ज्यादा शव बरामद हुए हैं। गंगा में बहते शवों ने उत्त र प्रदेश और बिहार के राजनीतिक गलियारों में घमासान छेड़ दिया है। सीएम योगी आदित्यानाथ और सीएम नीतिश कुमार दोनों बीजेपी नेता आमने सामने आ चुके हैं।

दोनों सरकारें एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। इस घमासान के बीच योगि आदित्यनाथ के फैसले ने बिहार सरकार चरमारा गई है। चंपारण के भाजपा नेताओं और आम लोगों में यूपी सरकार के फैसले से बेचैनी और नाराजगी जारी है। जानकारी दे दें कि मामला कोरोना का नहीं, बल्कि नदी पर चैनल निर्माण से जुड़ा हुआ है। राज्यप के पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद ने बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर चैनल का निर्माण कर नदी की मुख्य धारा को बदलने के विरोध में आवाज ऊंची की है।

नारायण प्रसाद ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जल संसाधन मंत्री संजय झा और विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर चैनल निर्माण कार्य बंद कराने का अनुरोध किया है। पर्यटन मंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि चैनल का निर्माण से उत्तर प्रदेश की नदियों की मुख्य धारा बिहार की गंडक नदी में हो जाएगी। इससे चंपारण तटबंध पर दबाव बढ़ेगा, जिससे योगापट्टी, बैरिया तथा नौतन प्रखंड में बाढ़ की तबाही में हो सकती है।