नेताओं की बयानबाजी को लेकर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) और असम गण परिषद ( अगप ) के बीच गतिरोध आज भी जारी है । बयानबाजी से गठबंधन पर संकट के बादल अभी भी नहीं टले हैं । 

अगप की ओर से जहां बयानबाजी पर लगाम लगा है वहीं दूसरी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत दास ने हिमंता के बयान का समर्थन करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से अगप पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश की जनता को  ब्लैकमेल कर सत्ता में बने रहना नहीं चाहती है । भाजपा की नीति साफ और उसी के आधार पर भाजपा प्रदेश की सत्ता में है । 

एक कार्यक्रम के दौरान दास ने कहा कि गठबंधन धर्म का पालन दोनों दलों को करना चाहिए क्योंकि भाजपा का मुख्य एजेंडा ही सभी के साथ  मिलकर राज्य का चहुंमुखी विकास करना है । पार्टी जनता के सामने अपने एजेंडे को साफ कर चुकी है। भाजपा प्रदेश की जनता को किसी भी मुद्दे को अंधेरे में रखकर राजनीति नहीं कर रहीं है । 

भाजपा राज्य तथा देश के निर्माण के लिए काम करने आई है । जनता से ब्लैकमेल कर सत्ता में रहने नहीं आई है । दास ने कांग्रेस का  से मिलकर लड़ने के आह्वान पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में सत्रों की जमीन पर कज्जा किया गया, घुसपैठियों को बसाया गया, घुसपैठियों का विरोध करने वाले राज्य के आठ सौ  से अधिक युवाओ की हत्या  की गई । 

ऐसी पार्टी के साथ अगप ठीक से  काम नहीं कर सकेगी । भाजपा पर अगप द्वारा जातीय द्रोह विधेयक लाने के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए दास ने पलटवार किया और कहा कि अगप का गठन जिस उदेश्य से हुआ था उस उदेश्य का उन्होंने ठीक से पालन नहीं किया । वहीं कांग्रेस के कार्यकाल में जो पाप कार्य किया गया भाजपा उस पाप का प्रायश्चित कर रही है । 

एक प्रश्न का  उत्तर देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि भाजपा नीत गठबंधन सरकार में अगप के तीन मंत्री हैं। उन्हें अपने- अपने विभागों की जिम्मेदारी का ख्यात रखते हुए विकास कार्यं में लग जाना चाहिए । अगर कोई भी मंत्री उस विभाग का काम ठीक से नहीं करता है तो उनकी नाकामयाबी का ठीकरा मुख्यमंवी सर्वानंद सोनोवाल के माथे पर नहीं फोड़ा जा सकता । 

उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष को हमने लगातार सूबे की  राजनीतिक गतिविधियों से अवगत कराया है । उनसे अगप के साथ गठबंधन तोड़ने के सिलसिले में कोई बात नहीं हुई है । अगर अगप गठबंधन से बाहर हो भी जाता है तो भाजपा को अधिक नुकसान नहीं होने वाला है।